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अखिलेश बोले: बाबा मुख्यमंत्री की भाप निकाल देंगे युवा-किसान, भाजपा को कोस रहे थे सपा मुखिया तभी दगा दे गया माइक

Sat, 26 Feb 2022 09:49 PM IST
प्रशांत कुमार अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

अखिलेश यादव ने कहा कि गर्मी निकालने की बात कहने वाले बाबा मुख्यमंत्री का, गोरखपुर के युवा, बेरोजगार और किसान भाप निकाल देंगे। अखिलेश ने अभी 10 मिनट ही अपना भाषण पूरा किया होगा कि अचानक माइक में खराबी आ गई। पहले से गला खराब होने की वजह से बोलने में दिक्कत महसूस कर रहे अखिलेश असहज हो गए।
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि गर्मी निकालने की बात कहने वाले बाबा मुख्यमंत्री का, गोरखपुर के युवा, बेरोजगार और किसान भाप निकाल देंगे। भाजपा का इस बार सफाया होने जा रहा हैं। छठवें चरण के मतदान में ही इन्हें बहुत कुछ याद आ जाएगा। सपा ऐतिहासिक वोटों से जीतने जा रही है। जनता का रुख भांप मुख्यमंत्री ने अपने मठ लौटने की तैयारी भी शुरू कर दी है।

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अखिलेश, शनिवार को बासस्थान में पिपराइच और कैंपियरगंज विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशियों के पक्ष में संयुक्त जनसभा को संबोधित कर रहे थे। चुनाव प्रचार में पहली बार सभा करने गोरखपुर आए अखिलेश यादव ने कहा कि वह जब पिछली बार समाजवादी विजय रथ लेकर आए थे, तभी स्वीकार कर लिया था कि इस बार गोरखपुर की जनता कुछ नया इतिहास बनाने जा रही है। अब वह सच साबित होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे नौजवान वर्दी पहनकर देश और जनता की रक्षा करना चाहते थे, लेकिन उनकी भर्ती नहीं होने दी गई। समाजवादी सरकार आएगी तो पुलिस में भर्ती  निकाली जाएगी। 
 

अखिलेश ने कहा कि बाबा लोगों को झूठ नहीं बोलना चाहिए। और, यदि बाबा एक योगी हैं, तो उन्हें झूठ कत्तई नहीं बोलना चाहिए। लेकिन, जिस तरह से मुख्यमंत्री और भाजपा के लोग झूठ बोल रहे हैं, उस तरह से दुनिया की किसी भी राजनीतिक पार्टी के नेता नहीं बोलते। किसानों के मुद्दे पर उन्होंने भाजपा को घेरते हुए कहा कि किसानों की आय दोगुनी नहीं हुई, खाद नहीं मिली। यदि किसी को खाद की बोरियां मिली भी तो उसमें से पांच किलो खाद गायब हो गई। भूल से भी भाजपा की सरकार बनी तो 10 किलो की चोरी होने लगेगी। इस दौरान पिपराइच विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी अमरेंद्र निषाद, कैंपियरगंज की प्रत्याशी काजल निषाद, जिलाध्यक्ष अवधेश यादव, राजमती निषाद, डॉ. मोहसीन खान समेत कई पार्टी नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

न रहेगा बांस... न बजेगी बांसुरी
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा ने अपने घोषणापत्र में कहा था हवाई चप्पल पहनने वाला हवाई जहाज से चलेगा, लेकिन इन्होंने हवाई जहाज ही बेच दिए। हवाई जहाज खड़ा होने वाला हवाई अड्डा भी बेच दिया। पुरानी कहावत चरितार्थ कर दी कि न रहेगा बांस...न बजेगी बांसुरी। क्योंकि, जब सब बिक जाएगा तो नौकरी कहां से मिलेगी। उन्होंने कहा कि 11 लाख खाली पदों पर भर्तियां तक नहीं निकाली गईं। तीन साल में बच्चों की शिक्षा और स्कूल बर्बाद हो गए। समाजवादी पार्टी सबकी मदद करेगी। 69,000 शिक्षक भर्ती की ठीक से जांच करेंगे ताकि युवाओं को उनका हक और सम्मान मिल सके।

 

11 मार्च को गुल्लू के लिए बिस्किट लेकर जाइएगा बाबा
अखिलेश ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि हम और आप सब परिवार वाले हैं। परंपरा है कि परिवार वाले जब भी कभी घर लौटते हैं तो कुछ न कुछ सामान लेकर आते हैं। इसलिए, अपने बाबा मुख्यमंत्री को सलाह है कि वह जब 11 मार्च को गोरखपुर वापस आएं तो अपने गुल्लू के लिए बिस्किट जरूर लेकर आएं। उन्होंने छुट्टा पशुओं को लेकर तंज कसते हुए कहा कि- हमने तो नहीं देखा गुल्लू...आपने देखा क्या गुल्लू। सुना है, यह भी बाबा मुख्यमंत्री का एक प्रिय जानवर है। मगर, सिर्फ गुल्लू ही नहीं, हमारे बाबा मुख्यमंत्री का एक और प्रिय जानवर है सांड़, जो किसानों के लिए मुश्किल बना हुआ है।

 

घोषणा पत्र भी बता गए अखिलेश
अखिलेश ने कहा कि इसबार साइकिल की रफ्तार को कोई नहीं रोक सकता। समाजवादी सरकार में 300 यूनिट बिजली फ्री मिलेगी। सिंचाई के लिए किसानों को भी कोई बिल नहीं देना पड़ेगा। पुरानी पेंशन भी बहाल होगी। समाजवादी सरकार बनेगी तो तीन महीने के अंदर सभी जातियों को गिनने का काम कराएगा जाएगा ताकि पता चले कि किस जाति के कितने लोग हैं। इससे उन्हें उनका अधिकार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। कहा कि गरीबों का मुफ्त इलाज होगा। एंबुलेंस की व्यवस्था और भी बेहतर बनाई जाएगी।

 
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...और अचानक दब गई आवाज
अखिलेश ने अभी 10 मिनट ही अपना भाषण पूरा किया होगा कि अचानक माइक में खराबी आ गई। पहले से गला खराब होने की वजह से बोलने में दिक्कत महसूस कर रहे अखिलेश असहज हो गए। उनकी आवाज और दब गई। भीड़ में से कई बार साउंड सही करने की मांग होती रही, मगर वह सही नहीं हो सका। यही नहीं जनसभा समाप्त होते ही नीचे से लेकर मंच तक पर भीड़ बेकाबू हो गई। धक्का-मुक्की शुरू हो गई। अखिलेश को खुद हस्तक्षेप भी करना पड़ा। 
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