कैंट थाने में घूस लेने के आरोप में गिरफ्तार ज्ञानेंद्र सिंह पुलिस टीम के साथ
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आय से अधिक संपत्ति मामले में केस दर्ज होने के बाद फिर से सुर्खियों में आया पुलिस ऑफिस का बर्खास्त बाबू ज्ञानेंद्र सिंह को जून 2019 में एंटी करप्शन टीम ने दरोगा से घूस लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। टीम के सदस्यों ने ज्ञानेंद्र के खिलाफ कैंट थाने में केस दर्ज कराया था। जांच के बाद शासन की ओर से उसे बर्खास्त कर उसकी संपत्तियों की जांच कराने का आदेश दिया गया था।
पुलिस की जांच में सामने आया था कि कैंपियरगंज थाने के बलुआ चौकी पर तैनात रहे दरोगा पंकज यादव ने बेटी की तबीयत खराब होने पर लखनऊ के अस्पताल में इलाज कराया था। इलाज में काफी पैसे खर्च हुए थे। चिकित्सा प्रतिपूर्ति के तौर पर उनकी 1.80 लाख रुपये की फाइल तैयार हुई थी। दरोगा पंकज यादव ने एसएसपी कार्यालय में तैनात बड़े बाबू ज्ञानेंद्र सिंह से गुजारिश की कि उनकी फाइल जल्द निस्तारित करा दें। दरोगा ने काफी दिनों तक गुजारिश की, पर फाइल निस्तारित नहीं हो सकी।
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दरोगा ने आरोप लगाया था कि कि बाबू ने फाइल को एसएसपी के सामने पेश करने के लिए 10 प्रतिशत के हिसाब से 18 हजार रुपये घूस मांगी थी। उसने 5000 रुपये देने को कहा, लेकिन लेकिन बड़े बाबू ने इनकार कर दिया। 13 जून को लखनऊ पहुंचकर एंटी करप्शन के तत्कालीन एसपी राजीव मल्होत्रा से शिकायत की। उनकी शिकायत पर हफ्ते भर के अंदर ही लखनऊ की टीम तत्कालीन इंस्पेक्टर हरि सिंह की अगुवाई में आई थी और पांच हजार घूस लेते ज्ञानेंद्र सिंह गिरफ्तार किया गया था।
एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि पुलिस ने निरीक्षक की तहरीर पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। साक्ष्यों के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।