सोशल मीडिया पर आर्थिक संकट के कारण गीता प्रेस के बंद होने की सूचना प्रचारित कर कुछ असमाजिक तत्वों द्वारा गीता प्रेस को बंदी से बचाने के नाम पर चंदा लेने का खेल कर ठगी की जा रही है। इस संदर्भ में गीता प्रेस व्यवस्था विभाग की ओर से पत्र जारी कर ऐसे ठगों से सावधान रहने को कहा जा रहा है। साथ ही पत्र में कहा गया कि संस्था किसी तरह का चंदा स्वीकार नहीं करती है।
गीताप्रेस में पुस्तकों का स्टॉक खत्म
मार्च से लगे लॉकडाउन साथ ही अनलॉक में थानावार बंदी के कारण गीताप्रेस से प्रकाशित होने वाली धार्मिक पुस्तकों का स्टॉक लगभग समाप्त हो गया है। मुश्किल से अप्रैल, मई और जून के कल्याण के अंक पाठकों तक पहुंचाए जा सके हैं। अबतक लॉकडाउन के कारण पुस्तक विक्रेताओं की मांग के अनुसार छपाई नहीं हो पा रही थी।
2015 में भी हुआ था चंदे की वसूली का खेल
वेतन को लेकर हुए असंतोष के चलते कर्मचारियों ने 2015 में काम बंद कर दिया। विवाद आगे न बढ़े, इसके लिए प्रबंधन ने प्रेस बंद कर दिया था। हालांकि दस दिनों में कर्मचारियों एवं प्रबंधन समझौता हो जाने के बाद प्रेस का काम शुरू हो गया। उसी दौरान मेरठ, दिल्ली, कोलकाता में कुछ लोगों ने गीताप्रेस के बंद होने का संदेश सोशल मीडिया पर प्रसारित कर चंदा मांगना शुरू कर दिया।
गीताप्रेस से जुड़े लोगों को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने प्रबंधन से बात कही। इसके बाद गीताप्रेस ने बैंक खाता बंद कर दिया, जिससे कि कोई इसमें रुपये जमा न कर सके। गीताप्रेस ने इसकी सूचना भी प्रसारित करा दी कि कोई आर्थिक संकट नहीं है और संस्था किसी से चंदा या अनुदान नहीं लेती। इसी पुराने संदेश की आड़ में लोग चंदा वसूलने की कोशिश करते हैं।