एबीवीपी कार्यकर्ताओं का कहना है कि छात्रों की समस्याओं को लगातार अनदेखी की वजह से घटना हुई है। गोविवि के छात्रनेता नारायण दत्त पाठक ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा है कि लगातार छात्रहितों की अनदेखी करना विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए आम हो गया है। हिंसात्मक घटना इसी का परिणाम है।
प्रवीण शुक्ला ने पोस्ट कर लिखा है, एक निश्चित सीमा से ज्यादा जब कुछ भी बढ़ जाता है तो टूटना भी निश्चित होता है। चाहे वह नदी पर बना बांध हो या सब्र का बांध। प्रसून त्रिपाठी ने लिखा है कि गोविवि की मनमानी सभी ने देखी है। परीक्षा के एक दिन पहले टाइम टेबल बदल जाता है। विश्वविद्यालय प्रशासन भी दूध का धुला नहीं है।