गोरखपुर और महाराजगंज के डाकघरों में 3,51,624 खाते निष्क्रिय पड़े हैं। इनमें लगभग 52 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। इन खातों में लंबे समय से लेनदेन नहीं किया गया है। इनमें ज्यादातर बचत खाते हैं। वहीं, मासिक जमा योजना और एमआईएस श्रेणी के खातों को भी निष्क्रिय मानकर लेनदेन पर रोक लगा दी गई है। नए नियम के तहत अब इन खातों के नॉमिनी या दावेदार को पैन और आधार कार्ड खाते से जोड़ने के साथ सक्रिय मोबाइल नंबर दर्ज कराना होगा तभी निकासी हो सकेगी।
डाकघर का नियम है कि तीन साल तक अगर किसी खाते से लेनदेन नहीं हुआ तो उसे निष्क्रिय मान लिया जाता है। इन खाताें को चालू करवाने के लिए खाताधारक को केवाईसी जमा करना पड़ता है। विभाग 12 सालों तक निष्क्रिय खातों के खाताधारकों का इंतजार करता है।
इस समय सीमा के बाद खाते को जब्त कर इसमें पड़ी रकम स्वत: सरकारी कोष में जमा कर दी जाती है। डाक विभाग की जांच टीम ने जो मामले पकड़े हैं उसमें अधिकारियों ने लापरवाही बरती और निष्क्रिय खातों में पड़ी रकम सरकारी खजाने में जमा नहीं कराई। इसकी जानकारी डाककर्मियों को थी और उन्होंने इसका फायदा उठाकर निष्क्रिय खातों से लाखों रुपये गबन कर लिए।
एसएसपी डाक विभाग मनीष कुमार ने कहा कि महाराजगंज और गोरखपुर में साढ़े तीन लाख से अधिक खाते निष्क्रिय हैं। इनमें जमा धनराशि वैसे ही खातों में जमा है। इनके असल वारिस या खाताधारक आएंगे तो विभागीय प्रक्रिया पूरी करने के बाद इनकी धनराशि निकाली जाएगी।