सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयों को निजी औद्योगिक पार्कों को लेकर आसानी से जमीन उपलब्ध कराने की योजना शुरू कर दी गई है। इसका असर यह है कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समित के तहत निजी टेक्सटाइल पार्क के लिए पहले 300 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव मिल चुका है। सरकार नेप्रमोटिंग लीडरशिप एवं इंटरप्राइज फॉर डेवलपमेंट ऑफ ग्रोथ इंजंस (प्लेज) के यह योजना बनाई है।
जानकारी के मुताबिक, निजी औद्योगिक पार्क कोविकसित करने के लिए जमीन के स्वामित्व सहित प्रस्ताव जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र को उपलब्ध कराना है। इसमें क्लस्टर आधारित प्रस्ताव को प्राथमिकता दी जाएगी। जमीन का उपयोग औद्योगिक होना हर हाल में जरूरी है। पार्क में एक एकड़ में कम से कम एक औद्योगिक इकाई होने चाहिए।
कुल भूखंड का 75 प्रतिशत एमएसएमई के लिए आवंटित करना अनिवार्य होगा। जबकि, रख-रखाव और संचालन की जिम्मेदारी भी निजी हाथों में होगी। जमीन खरीदने पर स्टांप शुल्क में 100 प्रतिशत की छूट भी दी जाएगी। विभाग की ओर से सर्किल रेट के अनुसार जमीन की कुल कीमत का 90 प्रतिशत या विकास करने पर आए खर्च में से जो भी कम होगा उसे दिया जाएगा। इसमें ऋण के लिए तीन साल तक एक प्रतिशत ब्याज और बाद छह प्रतिशत ब्याज देना होगा। विभाग का उद्देश्य है कि इससे निवेश तो होगा ही साथ ही लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
उपायुक्त उद्योग गौरव मिश्रा ने कहा कि निजी औद्योगिक पार्क की योजना में निवेश के लिए उद्यमी आगे आ रहे हैं। यह योजना काफी अच्छी है। इसमें कई औद्योगिक इकाईयां स्थापित होंगी। इससे उद्योग तो बढ़ेगा ही साथ ही बड़े स्तर पर लोगों को रोजगार भी मिलेगा।