टीम का नाम सुनते ही कर लेते हैं मोबाइल बंद
आरआरटी चरगांवा के चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार मिश्र का कहना है कि टीम को कोरोना मरीजों की मदद करने में कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार आरआरटी का नाम सुनते ही मरीजों के परिजन मोबाइल ऑफ कर लेते हैं। कुछ लोग यह भी कहते हैं कि उनके यहां इस नाम को कोई मरीज नहीं है। कुछ मरीजों के परिजन खुद अस्पताल चले आते हैं।
एप पर होती है रिपोर्टिंग
आरआरटी के काम में पारदर्शिता लाने के लिए एप सिस्टम लागू है। आरआरटी को न केवल मरीज के घर विजिट करनी है, बल्कि उससे जुड़े कई प्रकार के विवरण एप में दर्ज करने होते हैं। मरीज के घर में कितने कमरें हैं, कुल कितने सदस्य हैं, कितने वाशरूम हैं, केयर टेकर कौन है, मरीज को बीपी या शुगर की समस्या तो नहीं है, ऑक्सीजन लेवल क्या है, पल्स रेट क्या है, फीवर की स्थिति क्या है, यह सारे विवरण आरआरटी को लेने होते हैं। इन्हें एप पर दर्ज करना होता है।
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने कहा कि कोरोना मरीजों और परिवारों के साथ भेदभाव की भावना से ऊपर उठना होगा। भेदभाव की इसी भावना के कारण मरीज स्वास्थ्यकर्मियों की खुलेआम मदद लेने से बचते हैं। कोरोना मरीजों और उनके परिजनों को भी आरआरटी, निगरानी समिति और आशा कार्यकर्ताओं के प्रति अपना व्यवहार बदलना चाहिए। यह लोग उनकी मदद के लिए जा रहे हैं तो उनका स्वागत करें।