गोरखपुर क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी) के पांच मंजिला भवन में नौ लैब बनकर तैयार हैं। इनमें जीन मैपिंग से लेकर जीवाणुओं पर शोध और वैक्सीन की क्षमता की जांच हो सकेगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया को इसकी जानकारी दे दी गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री लैब का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों कराना चाहते हैं। उम्मीद है कि अगले माह प्रधानमंत्री लैब का लोकार्पण करें।
जानकारी के मुताबिक आरएमआरसी में जो नौ लैब बनाई गईं हैं वह सभी बीएसएल (बायोसेफ्टी लेवल) टू प्लस की हैं। इनमें एनिमल फेसेल्टी है। चूहे, खरगोश व गिनी पिग जैसे जानवर रखे जाएंगे, जिन पर वैक्सीन का परीक्षण हो सकेगा। वैक्सीन की क्षमता व उसके प्रभाव की जांच के लिए नमूने नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी (एनआईवी), पुणे नहीं भेजे जाएंगे। इन प्रयोगशालाओं में वैक्सीन की क्षमता और जीन मैपिंग जैसी जांचें हो सकेंगी। यह पूरी तरह से आधुनिक लैब हैं।
ये लैब बनकर हो चुकी हैं तैयार
- इम्युनोलॉजी : वैक्सीन की प्रतिरोधक क्षमता और उसके प्रभाव पर शोध होंगे।
- मॉलीक्यूलर बायोलॉजी : जीनोम सिक्वेंसिंग की जा सकेगी। अभी जीन सीक्वेसिंग के लिए नमूने दिल्ली और पुणे भेजे जाते हैं।
- माइकोलॉजी : फंगस की जांच सहित शोध हो सकेगा।
- मेडिकल इंटेमोलॉजी : डेंगू, चिकनगुनिया, इंसेफ्लाइटिस आदि के वाहक कीटों पर शोध होगा।
- नान कम्युनिकेबल डिजीज: मधुमेह व हाइपरटेंशन के कारणों की जांच की जाएगी।
- माइक्रोबायोलॉजी : वायरस और बैक्टीरिया पर शोध होंगे।
- सोशल बिहैवियर स्टडी : मानसिक बीमारियों पर शोध किया जाएगा।
- हेल्थ कम्युनिकेशन : बीमारियों की रोकथाम के उपायों के प्रचार-प्रसार का प्रमुख जरिया।
- इंटरनेशनल हेल्थ पॉलिसी : इसके जरिए विश्व स्तर की होने वाली बीमारियों के बारे में लोगों को बताया जाएगा।
निदेशक आरएमआरसी डॉ. रजनीकांत ने बताया कि आरएमआरसी के पांच मंजिला भवन में नौ लैब तैयार हैं। इनमें जीन मैपिंग से लेकर वैक्सीन की क्षमता, नई बीमारियों पर शोध आदि कार्य किए जाएंगे। एंटीबॉडी से लेकर वायरस की जांच हो सकेगी। लैब के लोकार्पण के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से समय मांगा गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों लैब का लोकार्पण कराएंगे।