सहजन के पौधे सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के अलावा कुपोषित बच्चों के घर व अन्य जगहों पर भी लगाए गए थे। लेकिन इन पौधों का वजूद कम ही जगह दिखाई दे रहा है। शहर से सटे कोलिया उत्तरी, बहरामपुर, चकरा पूर्वी, शेरगढ़ आदि गांवों में सरकारी केंद्रों पर ये पौधे नहीं मिले। शहरी क्षेत्र में बिछिया, पादरी बाजार, रामदत्तपुर आदि कई वार्डों में आंगनबाड़ी केंद्र पर भी ये पौधे नहीं मिले। ग्रामीण क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्र बेवरी में भी सहजन का पौधा सूख चुका है।
जहां जगह मिली वहां लगवाया
गोरखपुर शहर के महिला एवं बाल विकास विभाग के सीडीपीओ प्रदीप श्रीवास्तव का कहना है कि सितंबर में आंगनबाड़ी केंद्रों को सहजन का पौधा आवंटित किया गया था। जिन केंद्रों के सामने पौधा लगाने की जगह नहीं थी, वहां किसी लाभार्थी के घर या सरकारी भवन के खाली परिसर में पौधा लगाया गया। पौधरोपण की फोटोग्राफी भी कराई गई है। लोगों को भोजन में सहजन का प्रयोग बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
गुणकारी सहजन के प्रयोग को लेकर जागरूक नहीं हैं लोग
जिला चिकित्सालय के फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार का कहना है कि सहजन में विटामिन ए, बी, सी, कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम और प्रोटीन भरपूर मात्रा पाई जाती है। यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए लाभप्रद है। कुपोषित बच्चों के लिए यह महत्वपूर्ण औषधि है। लेकिन, लोग इसके प्रयोग को लेकर बहुत जागरूक नहीं हैं। इसके प्रयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
300 से अधिक आयुर्वेदिक दवाइयों में प्रयोग
आंगनबाड़ी विभाग की तरफ से जारी एक वीडियो में बताया गया है कि सहजन के पौधे में जड़ से लेकर पत्तियों तक में औषधीय गुण हैं। 300 से अधिक आयुर्वेदिक दवाइयों में इसका प्रयोग होता है। यह पौधा दुनिया के तमाम देशों में पाया जाता है और हर जगह पर लोग इसका प्रयोग स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए करते हैं।