गीता प्रेस से 15 से अधिक भाषाओं में हजारों पुस्तकें प्रकाशित होती हैं, लेकिन बात अगर सबसे महंगी और सबसे सस्ती पुस्तक की करें तो यहां से प्रकाशित होने वाली ताबीजी गीता सबसे सस्ती है। वहीं सबसे महंगी पुस्तक श्रीरामचरितमानस वृहदाकार है जिसकी कीमत 750 रुपये है।
संस्थापक ने कर दी थी व्यवस्था
ईश्वर पटवारी ने बताया कि बताया कि गीताप्रेस की स्थापना के समय ही इसकी व्यवस्था कर दी गई थी कि भगवान की सेवा का कार्य कभी रुकने न पाए और समाज के अंतिम व्यक्ति तक भगवान की वाणी व धार्मिक पुस्तकें आसानी से पहुंच सकें। ताकि, समाज में एक सकारात्मक वातावरण बने और सुंदर समाज का निर्माण हो सके। उद्देश्य पवित्र था, इसलिए कार्य आगे बढ़ता चला गया।