इतिहासकार मांटगोमेरी मार्टिन ने अपनी पुस्तक 'द इंडियन एंपायर' में इस मंदिर का भी जिक्र किया है और लिखा है कि एक बंगाली ब्राह्मण ने देशवासियों में मां के प्रति भक्ति भावना जागृत करने के लिए इसका निर्माण कराया।
जिले का था पहला सरकारी अखाड़ा
कालीबाड़ी के महंत रविंद्र दास बताते हैं कि कालीबाड़ी जिले का पहला सरकारी अखाड़ा भी था। यहां से प्रशिक्षित पहलवान राष्ट्रीय स्तर की ख्याति प्राप्त कर चुके हैं। वह मास्टर चंदगी राम, सतपाल, पन्ने लाल, अक्षयवर सिंह, कपिलदेव सिंह जैसे पहलवानों का नाम पह इस अखाड़े से जोड़ते हैं।
मंदिर में है इन देवी देवताओं की प्रतिमा
कालीबाड़ी मंदिर में माता काली के अलावा दुर्गा माता, शीतला माता, शंकर, हनुमान जी, राधा कृष्ण और साईं बाबा की मूर्तियां भी स्थापित हैं। माता काली के दर्शन के उपरांत भक्त मंदिरा में सभी देवी देवताओं के दर्शन कर आर्शीवाद प्राप्त करते हैं।
धूमधाम से मनता है दुर्गा पूजा
कालीबाड़ी मंदिर में वैसी तो हमेसा भी भक्तों की भीड़ रहती है लेकिन शारदीय नवरात्र में यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। वहीं यहां दुर्गा पूजा का आयोजन भी धूमधाम से होता है। मंदिर के ठीक बगल में बंगाली रीति रिवाज से नवरात्र में माता की प्रतिमा 50 वर्षों से स्थापित हो रही है। बड़ी संख्या में भक्त प्रतिमा का दर्शन करने पहुंचते हैं। पूरे नवरात्र यहां मेला लगा रहता है।