रेलवे प्रशासन ने कॉकरोच और चूहों को मारने के लिए करीब सात लाख की सुपारी दी है। यह काम एक प्राइवेट फर्म को मिला है, जिसके कर्मचारी पेस्टिसाइड से इन्हें मारते हैं। लेकिन यह सुनकर आश्चर्य होगा कि लॉकडाउन में चूहे अपने आप ही कम हो गए हैं। ट्रेनें चली नहीं तो पटरियों पर उन्हें खाने के लिए कुछ मिला नहीं। ऐसे में उन्होंने भूख से ही दम तोड़ दिया।
जंक्शन पर पेस्ट कंट्रोल का काम देखने वाले कांट्रेक्टर आरपी मिश्रा ने बताया कि लॉकडाउन के समय से काम ठप था। चूंकि सबकुछ बंद था इसलिए चूहे भी गायब हो गए। कई तो मर गए तो कुछ यहां से चले गए। अब दोबारा से ट्रेनें चलाई जा रही हैं तो हम लोगों ने काम शुरू कर दिया है। लेकिन अभी चूहे काफी कम दिख रहे हैं।
स्टेशन पर चूहों के आंतक का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके खात्मे के लिए हर महीने 55 हजार रुपये खर्च किया जाता है। इसमें दवाइयां, मैन पॉवर और चूहों के बिल को बंद करने का काम होता है। लेकिन दो महीने तक दवा डालकर चूहों को मारने का काम ठप था बावजूद चूहे नहीं दिखे।
स्टेशन पर चूहों का सर्वाधिक आतंक पार्सल और अमानती सामान घर में है। यहां रखे जा रहे सामानों को चूहे अक्सर कुतर देते हैं। हालांकि इस समय स्थिति सामान्य है।