मानसरोवर रामलीला में दशहरे के दिन गोरक्षपीठाधीश्वर पहुंचकर श्रीराम का तिलक करते हैं। यह परंपरा जबसे रामलीला शुरू हुई तभी से चली आ रही है। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ एवं ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ गोरखनाथ मंदिर हाथी के ऊपर पालकी में सवार होकर जुलूस के रूप में भगवान राम का तिलक करने आते थे। उसी परंपरा का निर्वहन वर्तमान पीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं लेकिन अब हाथी की जगह रथ का प्रयोग होता है।
रामलीला समिति के रेवती रमण दास ने बताया कि अध्यक्ष रामलीला की शुरुआत इस क्षेत्र में इसलिए की गई थी कि पूरे गोरखपुर में केवल एक ही रामलीला होती थी, इधर के सभी लोग वहां जा नहीं पाते थे। विजयादशमी के दिन गोरक्षपीठाधीश्वर का विजय यात्रा निकलता है जो अस्त्र-शस्त्र से सुसज्जित होता है।
रामलीला समिति महामंत्री पुष्पदंत जैन ने बताया कि इस बार गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भगवान राम का तिलक करेंगे। कोरोना के संकट काल में श्रद्धालुओं तक रामलीला मंचन के कार्यक्रम पहुंचे इसके लिए सोशल मीडिया के माध्यम से मंचन का सजीव प्रसारण कराया जाएगा।
रामलीला समिति के प्रवक्ता विकास जालान ने बताया कि 16 से 26 अक्तूबर तक शाम सात बजे से अयोध्या के पं शिव शरण मिश्र इस बार रामलीला की प्रस्तुति करेंगे। इस वर्ष कोरोना महामारी को देखते हुए केवल 100 श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था ही लीला प्रांगण में की गई है।
रामलीला समिति के कोषाध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने बताया कि रामलीला की तैयारी एक माह पूर्व से हम लोग शुरू कर देते हैं। कोरोना को देखते हुए इस बार कार्यक्रम में बदलाव किए गए हैं। राम बारात, भरत मिलाप एवं राज्याभिषेक का जुुलूस इस बार नहीं निकलेगा सारे कार्यक्रम मंच पर ही होंगे।