राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना के तहत जिस रामगढ़ ताल के सुंदरीकरण और संरक्षण पर करीब 186 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, उसके मेंटेनेंस के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। जिन विभागों को मेंटेनेंस का खर्च वहन करना है उन्होंने करीब तीन साल से इन विभागों की ओर से इस मद में भुगतान नहीं किया जा रहा है।
रामगढ़ ताल के सुंदरीकरण के बाद मेंटेनेंस के लिए जीडीए को हरेक साल 2.504 करोड़, नगर निगम को 2.484 करोड़ और आवास विकास परिषद को 1.614 करोड़ रुपये देने हैं, लेकिन काफी समय से यह रकम नहीं दी जा रही है। अभी हाल में रामगढ़ ताल में जलकुंभी फैल गई थी। इसकी वजह से ताल में लगाए गए लाइट एंड साउंड शो के अलावा नौकायन पर भी संकट गहरा गया था। प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री एवं गोरखपुर के प्रभारी मंत्री रमापति शास्त्री के निर्देश के बाद कार्यदायी संस्था जल निगम ने ताल की सफाई शुरू कराई। रामगढ़ ताल परियोजना प्रबंधक रतनसेन के अनुसार अब भी मेंटेनेंस पर आने वाले खर्च का वहन करने वाले जिम्मेदार विभागों नगर निगम, जीडीए और आवास विकास परिषद की ओर से इस मद में बकाया रकम का भुगतान नहीं किया गया है।
मामला विधानसभा में उठाऊंगा
रामगढ़ ताल परियोजना जब स्वीकृत हुई थी तब अंजू चौधरी मेयर थीं। परियोजना पूरी होने पर सालाना मेंटेनेंस छह करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था। मेंटेनेंस पर आने वाले खर्च का मसला उस समय उठा था और पूरे खर्च का वहन नगर निगम द्वारा किया जाना तय हुआ था। लेकिन नगर निगम बोर्ड ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताते हुए इंकार कर दिया। फिर मैंने विधानसभा में मामला उठाया था। इसके बाद तत्कालीन सरकार ने रामगढ़ ताल परियोजना के मेंटेनेंस पर आने वाला खर्च खुद ही वहन करने का फैसला लिया था। इस बात की जानकारी नहीं है कि यह फैसला कब बदल गया। बताया जा रहा है कि मेंटेनेंस पर आने वाला खर्च नगर निगम, जीडीए और आवास विकास परिषद को उठाना है, लेकिन जो स्थिति है यह चिंताजनक है। मेंटेनेंस पर आने वाले खर्च का स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए। इस मामले को विधानसभा में उठाऊंगा। ताकि इस महती परियोजना पर ग्रहण न लगे।
- डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल, नगर विधायक
11 गुना कम हुआ रामगढ़ ताल के पानी का बीओडी
गोरखपुर। जब तक रामगढ़ ताल में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा था तब तक ताल के पानी में जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) की मात्रा 108 मिलीग्राम प्रति लीटर था। लेकिन आज के समय में यह मात्रा कम होकर 10 एमजी प्रति लीटर हो गई है। रामगढ़ ताल परियोजना प्रबंधक रतनसेन सिंह ने कहा कि ताल में एसटीपी लगने के बाद एमएनआईटी इलाहाबाद और बीएचयू वाराणसी के विशेषज्ञों ने एक साल तक मॉनिटरिंग की। सारे पैरामीटर पर टेस्टिंग की गई। लगातार एक साल तक 10 एमजी प्रति लीटर बीओडी मिला है। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ. गोविंद पांडेय ने कहा कि पानी में 108 बीओडी होने का मतलब था कि ताल में सीवेज मिश्रित पानी जा रहा था। इसके लेवल कम होकर 10 तक पहुंचना बहुत ही संतोषजनक है।