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पेड़ कटान से पीडब्ल्यूडी का इनकार, सड़क चौड़ीकरण में पेड़ काटने का लगा है आरोप

Sat, 15 Feb 2020 02:20 AM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
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सांकेतिक तस्वीर।
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बांसगांव-माल्हनपार-दशवतपुर-उरुवा मार्ग के चौड़ीकरण में सड़क के किनारे काटे गए पेड़ों को लेकर लोक निर्माण विभाग व वन विभाग के बीच ठन गई है। वन विभाग ने जहां इस मामले में लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता और मेठ के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया है, वहीं मुख्य अभियंता पीडब्ल्यूडी एसपी सिंह ने कमिश्नर को पत्र लिखकर सवाल उठाया है कि सड़क चौड़ीकरण में जद में नहीं आ रहे पेड़ों को क्यों कटवाया जाएगा ? उन्होंने आरोप लगाया कि उनके विभाग के मेठ को टार्चर कर गलत बयान दिलाया गया।

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मुख्य अभियंता का कहना है कि जब सड़क चौड़ीकरण की डीपीआर बनाई जाती है तो यह देखा जाता है कि जद में क्या-क्या चीजें आ रही हैं। यदि पेड़ आते हैं तो डीपीआर में उसकी लागत वन विभाग से पूछ कर तय की जाती है। फिर विभाग को उसका भुगतान करने के बाद ही पेड़ की कटान की जाती है।

जिस सड़क की बात हो रही है, उसेे दो मीटर ही चौड़ा होना है, जबकि जो पेड़ कटे हैं वह न्यूनतम 3.50 मीटर से 6.50 की परिधि में अवैध रूप से कटे हैं। दो मीटर की चौड़ाई में कही भी पेड़ कटा नहीं पाया गया। जो पेड़ काटे गए हैं, वे सड़क के चौड़ीकरण में कोई बाधा नहीं पैदा कर रहे थे। ऐसे में पीडब्ल्यूडी पर पेड़ काटने का आरोप बेबुनियाद है।
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वर्जन

लोक निर्माण विभाग मुख्य अभियंता एसपी सिंह ने कहा कि मैंने मौके पर मुआयना किया है। जो पेड़ काटे गए हैं, उनका प्रस्तावित चौड़ीकरण से कोई संबंध नहीं है। लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी या अधिकारी का इससे कोई संबंध नहीं है। इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी गई है। रिपोर्ट के बाद यदि कोई दोषी पाया गया तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।



 

अवर अभियंता के कहने पर मेठ ने कटवाए थे पेड़ : डीएफओ

पेड़ की कटान के मामले में वन विभाग ने भी कमिश्नर को पत्र लिखकर अपना पक्ष रखा है। वन विभाग ने पत्र में बताया कि मेठ ने स्वीकार किया कि पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता के कहने पर उन्होंने सड़क किनारे लगे पेड़ों की कटाई कराई थी।

डीएफओ बीसी ब्रह्मा ने बताया कि पीडब्ल्यूडी के पास क्षतिपूर्ति को लेकर पत्र भेज दिया गया है। इसके बाद भी पीडब्ल्यूडी ने क्षतिपूर्ति नहीं की तो वन विभाग की तरफ से चौड़ीकरण की स्वीकृति नहीं दी जाएगी। मेठ के बयान के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वन विभाग ने इस संबंध में दो पत्र जारी किए हैं। पहला पत्र पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता और दूसरा पत्र कमिश्नर के नाम लिखा गया है। मुख्य अभियंता को लिखे पत्र में मेठ के बयान का उल्लेख है। पत्र के मुताबिक, मेठ ने अपने बयान में कहा कि वह मेठ के पद पर कार्यरत है। माल्हनपार से उरुवा मार्ग पर बथुआ (मरचा बंजरिया) के मध्य मार्ग का चौड़ीकरण कराया जा रहा है।

पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता उमेंद्र सिंह के निर्देशन में काम कराया जा रहा है। सड़क किनारे लगे काफी पेड़ों को उन्होंने बिना वन विभाग को जानकारी दिए ग्रामीणों से हटवा दिया। इस बयान के आधार पर वन विभाग ने भारतीय वन्य अधिनियम 1927 के तहत वन विभाग में मुकदमा दर्ज कराया है। पत्र में क्षतिपूर्ति के लिए भी कहा गया है।

 
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मेठ पर गांव वालों को उकसाने का आरोप

कमिश्नर को लिखे दूसरे पत्र में वन विभाग ने उन्हें मेठ के बयान के आधार पर पूरे मामले की जानकारी दी गई है। पत्र के माध्यम से यह भी कहा गया है कि इस मामले में वन विभाग के किसी कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध नहीं पाई गई। पत्र के जरिए पीडब्ल्यूडी के संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।

वन विभाग की तरफ से कमिश्नर को लिखे पत्र में मेठ पर भी आरोप लगाया गया है। पत्र में कहा गया है कि वन विभाग की जांच में पाया गया कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान ही मेठ दरबारी ने गांव वालों को उकसा कर पेड़ की कटाई करा ली थी। मेठ की शह पर ही गांववालों ने रातों रात पेड़ों की कटाई कर दी थी।

कमिश्नर के निर्देश पर शुरू हुई जांच
सड़क चौड़ीकरण में पेड़ काटने के मामले में शुक्रवार को मंडलायुक्त के निर्देश पर एसडीएम गोला राजेंद्र बहादुर व एसडीएम खजनी विपिन कुमार ने मौके का निरीक्षण किया। एसडीएम खजनी ने बताया कि उनके तहसील क्षेत्र में दो गांव गोपालापुर और बंजरिया में 85 पेड़ काटे गए हैं। वहीं तीन सौ से अधिक पेड़ गोला तहसील क्षेत्र में काटे गए हैं। अफसरों ने मौके पर मौजूद लोगों से भी कटान के बारे में जानकारी ली। उन्होंने मौके पर मौजूद वन विभाग के रेंजर देवेंद्र कुमार और पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता से भी जानकारी ली। एसडीएम ने बताया रिपोर्ट कमिश्नर को सौंपी जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
 
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