गोरखपुर विकास प्राधिकरण के सचिव उदय प्रताप सिंह।
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मंथन के दौरान मनमय बिल्डर्स के मुन्ना रावत ने पहले विकसित हो चुकी कॉलोनियों पर भू-प्रयोग को लेकर कार्रवाई नहीं करने और सीवर- सड़क की समस्या उठाई। सिटी बिल्डर एवं कॉलोनाइजर के दिग्विजय सिंह ने करीमनगर में पहले से सड़क मौजूद होने के बाद भी कॉलोनी की आवासीय जमीन पर नई महायोजना में एक और सड़क प्रस्तावित कर देने को गलत ठहराया। जीत एसोसिएट के अखिलेश राय ने शहर के मुख्य सड़क के किनारे की जमीन का भू-उपयोग व्यावसायिक करने की मांग की और आबादी वाले क्षेत्र की जमीन ग्रीन लैंड करने पर आपत्ति दर्ज कराई।
आबादी वाला क्षेत्र विनियमित, जहां
नव दुर्गा व अनुज एसोसिएट के पंकज सिंह और मनोज तिवारी ने देवरिया रोड के किनारे बसे बनसप्ती, बेलवार में घनी आबादी वाले क्षेत्र की जमीन का भू-उपयोग ग्रीन लैंड और बफर जोन किए जाने का मुद्दा उठाया। साथ ही कहा कि नई महायोजना 2031 के प्रारूप में बहुत गड़बड़ियां हैं। घनी आबादी वाले भरवलिया को विनियमितीकरण की जमीन और 10 फीट पानी लगने वाले ताल कंदरा की जमीन आवासीय कर दी गई है।
नोटिस का समुचित जवाब दें, ले-आउट जरूर स्वीकृत कराएं
वीएन बालाजी के प्रोपराइटर योगेश तिवारी और अभिषेक पांडेय, सनलाइन ग्रीन प्राइवेट लिमिटेड के प्रोपराइटर भरत सिंह के साथ ही वर्ल्ड टेक होम साल्यूशन के प्रोपराइटर शैलेंद्र सिंह समेत कुछ रियल इस्टेट कारोबारियों ने नोटिसों पर आपत्ति जताई। सबने कहा कि प्राधिकरण का दायरा करीब एक-डेढ़ साल पहले बढ़ा है। इससे पहले से ही जीडीए क्षेत्र से बाहर कॉलोनी विकसित कर लोगों को प्लॉट उपलब्ध कराए जा रहे थे। मगर, जीडीए ने उन्हें भी नोटिस भेज दिया। जब वे जीडीए में जवाब देने पहुंचे तो बताया गया कि वह क्षेत्र प्राधिकरण के दायरे में नहीं आता। जब वे नगर पंचायतों के पास पहुंचे तो वहां जवाब मिला कि जिला पंचायत या नगर पंचायत में अभी इसे लेकर कोई बायलॉज ही नहीं बना है।
यहीं नही, नई महायोजना में नौसड़ से वाराणसी समेत मुख्य सड़क के आस-पास के कई क्षेत्र का लैंड यूज नहीं बदला गया। ऐसे में वहां आवास बनवा कर रह रही बड़ी आबादी, आने वाले समय में मुश्किल में पड़ सकती है। इसपर जीडीए सचिव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि प्राधिकरण का दायरा बढ़ा है। कुछ नगर पंचायतें भी अब प्राधिकरण क्षेत्र में आ गई हैं। ऐसे में सुनियोजित विकास के लिए नोटिस दिए गए थे। नोटिस से घबराने के बजाए समुचित जवाब दें। रियल इस्टेट कारोबारी ले-आउट जरूर स्वीकृत कराएं।
संवाद के दौरान कई रियल इस्टेट कारोबारियों ने नई महायोजना के प्रारूप में शहर की जमीन का लैंड यूज सही नहीं करने तथा शहर से सटे फोरलेन, हाईवे के किनारे बफर जोन की व्यवस्था करने से बड़ी क्षति की बात कहीं। इसपर आर्किटेक्ट मनीष मिश्रा ने कहा कि आमजन, विशेष कर रियल इस्टेट कारोबारी अपने अधिकारों को समझें। महायोजना के प्रारूप में ग्रीन लैंड, ओपन एरिया, विनियमितीकरण के भूखंड का लैंड यूज बदलने को लेकर भले ही परिवर्तन नहीं किया गया है लेकिन आमलोग खुद ही आपत्ति दर्ज कर परिवर्तन की अपील कर सकते हैं।
मंथन से निकले ये मोती-
- जमीन से जुड़ी जानकारी के लिए ऐसा सिंगल विंडो बनाया जाए, जहां से जीडीए के मानक, राजस्व आदि विभागों से जुड़ी जानकारी एक ही प्लेटफार्म पर मिल सके।
- ले-आउट और मानचित्र स्वीकृति का शुल्क घटाकर अवैध निर्माण कम किया जा सकता है
- नई महायोजना की खामियां दुरुस्त कराने के लिए आपत्ति दर्ज कराना जरूरी
- भू-उपयोग से जुड़ी आपत्ति दर्ज कराने के लिए उप्र नगर नियोजन और विकास अधिनियम बड़ा हथियार बन सकता है
- प्राधिकरण के बाहर के क्षेत्र में मानचित्र स्वीकृति के लिए जिला पंचायत और नगर पंचायतों में भी बायलॉज बने
- रियल इस्टेट कारोबारी मानक के मुताबिक कॉलोनी में सीवर, सड़क आदि जरूरी सुविधाएं जरूर विकसित करें
संवाद में यह भी रहे मौजूद
ऑर्बिट के प्रोपराइटर अभिषेक अग्रवाल, एचएस कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर रितेश सिंह, संजय कुमार श्रीवास्तव, एबीपीएच के अतुल सिंह, वीएस बंधन ग्रुप के सोनू पाठक और जितेंद्र पाल, एसके एसोसिएट के प्रोपराइटर शशिकांत, वसुंधरा सिटी के संजीव कुमार सिंह, सुशांत सिटी के प्रशांत जोशी, विंध्य ज्योति प्राइवेट लिमिटेड के अनुराग, वसुधा ग्रुप के सौरभ।
विशेष सहयोग
‘पूर्वोदय: राइजिंग गोरखपुर’ का वेन्यू पार्टनर है। मेयर सीताराम जायसवाल और नगर आयुक्त अविनाश सिंह का विशेष सहयोग है। हॉस्पिटैलिटी पार्टनर रेड कारपेट तारामंडल है। प्रबंधक शिवम सिंह का विशेष सहयोग है।