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महंगाई की आग: रसोई से कारोबार तक महंगाई का प्रहार, आम आदमी की जेब पर पड़ा सीधा असर

Mon, 11 Oct 2021 05:23 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम बढ़ने से महंगाई चरम पर पहुंची है। यातायात किराया और अन्य जरूरत का सामान भी महंगा हुआ है। इन सबका असर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से आम आदमी की जेब पर पड़ा है।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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पेट्रोल-डीजल और गैस के बढ़ते दाम घर से कारोबार तक असर डाल रहे हैं। इस साल जनवरी से अक्तूबर के बीच पेट्रोल के दाम 21 फीसदी और डीजल के दाम 25 फीसदी तक बढ़े हैं। रसोई गैस के दाम में भी इस दौरान 27 फीसदी की वृद्धि हुई। रसोई गैस के बढ़ते दाम से खाने पीने की चीजें महंगी हुईं और रसोई का बजट बिगड़ा तो पेट्रोल-डीजल के कीमतों में उछाल आने से किराये पर असर पड़ा। मालभाड़ा महंगा होने से जरूरी वस्तुओं के दाम भी बढ़े। इन सबका असर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से आम आदमी की जेब पर पड़ा है।   
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महंगाई दिखा रही अप्रत्यक्ष असर
ब्रेड-बिस्कुट, नमकीन आदि खाद्य वस्तुओं के दाम फिलहाल प्रत्यक्ष रूप से नहीं बढ़े हैं लेकिन इनकी मात्रा और वजन में दस से बीस फीसदी की कमी की गई है। यानी पैकज्ड खाद्य वस्तुएं अप्रत्यक्ष रूप से दस से बीस फीसदी महंगी हुई हैं। बीस रुपये में मिलने वाला ब्रेड पहले 280 ग्राम का आता था अब यह पैकेट 250 ग्राम का हो गया है।

दस रुपये वाले ब्रेड का वजन डेढ़ सौ ग्राम होता था अब वह भी सवा सौ ग्राम का कर दिया गया है। दस रुपये में पचास ग्राम नमकीन वाले पैकेट में अब 45 ग्राम ही नमकीन मिल रही है। यही हाल बिस्कुट का है। पांच रुपये वाले बिस्कुट के पैकेट में वजन पांच से आठ ग्राम कम किया गया है।
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समोसा-कचौड़ी, मिठाई भी हुईं महंगी
महंगाई का असर नाश्ते की दुकानों पर भी दिखाई दे रहा है। हलवाइयों ने समोसे के दाम सात से दस रुपये तक कर दिए हैं। बेसन से बनी मिठाई के दाम 40 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़े हैं तो दूध से निर्मित मिठाई के दाम भी चालीस से साठ रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए गए हैं। मेवा आधारित मिठाइयों के दाम में भी सौ से दो सौ रुपये किलोग्राम तक बढ़त हुई है।

माल भाड़ा बढ़ने से महंगा हुआ जरूरी सामान

गोरखपुर गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष सिंह के मुताबिक इस वर्ष डीजल के दाम 74 रुपये से 93.42 रुपये यानी 25 फीसदी बढ़े हैं। इसके विपरीत माला भाड़ा मात्र दस फीसदी ही बढ़ा है। एसोसिएशन के सह अध्यक्ष अब्दुल रशीद कहते हैं कि डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं अब मालभाड़ा बढ़ाया जाना मजबूरी है।   
 
बजट संभालने के लिए हो रही कटौती  
सीमित बजट में महंगाई का सामना करने के लिए लोग खर्च में कटौती कर रहे हैं। निजी स्कूल की टीचर दीक्षा कहती हैं कि बंधे बंधाए वेतन में घर चलाने के लिए रसोई में जरूरी सामान को छोड़कर कटौती कर रही हैं। कारोबारी रितेश अब सब्जी और किराने का सामान खरीदने के लिए डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित बाजार पैदल ही जाते हैं। वहीं समीर ने बचत करने के लिए बाइक खरीदी है। बताते हैं बाइक चलाने से महीने में करीब पचास लीटर पेट्रोल की बचत हो रही है यानी पांच हजार रुपये की बचत।  
लागत बढ़ी लेकिन आमदनी घटी
उत्तर प्रदेश पेट्रोलियम ट्रेडर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और गोरखपुर मंडल अध्यक्ष राजन शाही कहते हैं कि डीजल-पेट्रोल के दाम सर्वोच्च स्तर पर पहुंच चुके हैं लेकिन पंप संचालकों का कमीशन 2018 से नहीं बढ़ा। इससे पंप संचालकों के सामने पूंजी का संकट खड़ा हो गया है। यदि तेल विपणन कंपनियों ने जल्द ही कमीशन राशि नहीं बढ़ाई तो कई पंप संचालक तेल खरीदने में असमर्थ हो सकते हैं। 
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प्रतिस्पर्धी दाम पर उत्पाद बनाना मुश्किल

चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष आरएन सिंह कहते हैं कि माल भाड़ा दस फीसदी बढ़ने से कच्चे माल की कीमत बढ़ गई है। इससे कंपनियों को प्रतिस्पर्धी दाम पर उत्पाद निर्माण काफी मुश्किल होता जा रहा है। माला भाड़ा बढ़ने से इन उत्पादों के दाम बढ़ाया जाना मजबूरी है।  
 
इस तरह बढ़े ईंधन के दाम
माह         पेट्रोल        डीजल          रसोई गैस
जनवरी     83.66     74.78    756.50
फरवरी     85.66    76.93 831.50
मार्च        89.37  81.92   881.50
अप्रैल       88.92   81.32  871.50
मई          88.77 82.19   871.50
जून         81.81   85.86   871.50
जुलाई       96.08  89.64  897.50
अगस्त      98.74  90.34     922.00
सितंबर     98.93   90.44  947.00
अक्तूबर    101.36 92.67  962.00 

 
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