प्रदेश के राजकीय पॉलीटेक्निक में संचालित ऐसे डिप्लोमा कोर्स जिसमें अभ्यर्थियों का प्रवेश कुल सीटों के सापेक्ष 10 फीसदी से कम है। उसे प्राविधिक शिक्षा निदेशालय की ओर से बंद करने की कवायद शुरू की गई है। इनकी जगह अब औद्योगिक इकाइयों की मांग के अनुरूप नए कोर्स का संचालन होगा।
पहले चरण में गोरखपुर समेत प्रदेश के 17 पॉलीटेक्निक में चलने वाले सात तरह के कोर्स को चिह्नित किया गया है। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। गोरखपुर महिला पॉलीटेक्निक में 20 वर्ष से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन (पीजीडीसीए) और मार्डन ऑफिस मैनेजमेंट (एमओएम) कोर्स का संचालन किया जा रहा है।
शुरुआत में तो इन डिप्लोमा कोर्स की विद्यार्थियों में अच्छी डिमांड थी, मगर गुजरते वक्त के साथ अब इन कोर्सेज में अभ्यर्थियों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। पिछले पांच वर्षों में तो 10 फीसदी से भी कम अभ्यर्थियों का प्रवेश इन कोर्सेज में हुआ है। जिसके बाद से प्राविधिक शिक्षा निदेशालय ने ऐसे कोर्स को चिह्नित करने की शुरुआत की है। इस कड़ी में महिला पॉलीटेक्निक के पीजीडीसीए कोर्स को भी चिह्नित किया गया है।
इन कोर्सेज की बढ़ी डिमांड
राजकीय महिला पॉलीटेक्निक में संचालित कंप्यूटर साइंस, आईटी, इलेेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल डिजाइन के कोर्स की अभ्यर्थियों में अच्छी डिमांड है। साल दर साल इनमें प्रवेश लेने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।
राजकीय महिला पॉलीटेक्निक के प्रधानाचार्य वीरेंद्र कुमार ने कहा कि शासन स्तर पर 10 फीसदी से कम अलोकप्रिय कोर्स को बंद करने की कवायद चल रही है। मगर अभी कोई लिखित आदेश नहीं मिला है। महिला पॉलीटेक्निक में पीजीडीसीए और एमओएम कोर्स में दस फीसदी से कम अभ्यर्थियों का प्रवेश हुआ है।