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Gorakhpur News: प्रदूषण और मौसम में परिवर्तन से बढ़ रही अस्थमा के मरीजों की तकलीफ

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- नए मामले बढ़े, पुराने मरीजों को लेना पड़ रहा दो से अधिक बार एनहेलर
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-शहर में बढ़ते प्रदूषण से बिगड़ रहा हार्माेनल बैलेंस
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। तापमान में उतार-चढ़ाव और प्रदूषण के बढ़े स्तर ने अस्थमा मरीजों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। डॉक्टर मरीजों को एनहेलर के नियमित प्रयोग की सलाह दे रहे हैं। वहीं मरीजों का कहना है कि दिन में एक बार से अधिक एनहेलर की जरूरत महसूस हो रही है। खांसी-जुकाम के मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो रही है।
श्वसन एवं एलर्जी रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋषभ बता रहे हैं कि दिवाली के बाद से ही ओपीडी में अस्थमा मरीजों की संख्या बढ़ने लगी थी। इसका सबसे बड़ा कारण है कि धूल व धुएं का प्रदूषण है। इन दिनों मौसम में परिवर्तन ने इसे और बढ़ा दिया है। अब हर दिन ओपीडी में 30 से 40 मरीज अस्थमा के आ रहे हैं। सामान्य दिनों में यह संख्या हर दिन 15-20 की रहती है।
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बड़ी बात यह है कि जिनकी बीमारी नियंत्रित थी, उन्हें भी दिक्कत हो रही है। इस वजह से एनहेलर की खपत बढ़ गई है। जिन मरीजों को एक बार से ही काम चल रहा था, उन्हें भी दो या उससे अधिक बार इसका प्रयोग करना पड़ रहा है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के श्वसन एवं चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. अश्विनी मिश्रा बता रहे हैं कि ओपीडी में करीब 20 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसमें से अधिक मरीज अस्थमा के ही आ रहे हैं। धूल और धुएं का प्रदूषण लोगों को परेशान कर रहा है। प्रदूषण से अब केवल सांस की बीमारी नहीं रही, बल्कि यह शरीर के हार्मोन संतुलन को भी गहराई से प्रभावित कर रहा है। हवा में मौजूद विषैले तत्व एंडोक्राइन डिसरप्टर्स की तरह काम करते हैं। ये पदार्थ थायरॉयड, इंसुलिन और प्रजनन हार्मोन के सामान्य कार्य में बाधक है। इससे थायरॉयड, डायबिटीज और महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन जैसे मामले बढ़ रहे हैं।

सड़क के बजाय बड़े पार्क में टहलें
श्वसन विशेषज्ञ डॉ. अश्विनी मिश्रा ने बताया कि सुबह अधिक नमी से प्रदूषण के कण संघनित होकर निचले स्तर पर आ जाते हैं। इस वजह से सांस लेने में दिक्कत होती है। अस्थमा या श्वसन संबंधी अन्य किसी भी बीमारी से ग्रसित मरीजों को ऐसे मौसम में एकदम सुबह टहलने से बचना चाहिए। ऐसे लोग सूर्योदय के बाद ही टहलने निकलें और मास्क का उपयोग करें। टहलने के लिए सड़क के बजाय ऐसे पार्क, जिसमें किनारे की तरफ ऊंचे पेड़ लगे हों, उसे चुने। क्योंकि पेड़ की वजह से वहां प्रदूषण का स्तर कम होता है।
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बच्चों में बढ़ रहा निमोनिया का प्रकोप
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जय कुमार ने बताया कि छठ पूजा के बाद से ही बच्चों में सर्दी-जुकाम के मामले बढ़े हैं। हर दिन ओपीडी में सर्दी-जुकाम, बुखार से पीड़ित बच्चे आ रहे हैं। छोटे बच्चों में यह मौसम निमोनिया संक्रमण के लिहाज से भी संवेदनशील है। सर्दी-जुकाम से पीड़ित जो बच्चे आ रहे हैं, उनके घर के किसी न किसी सदस्य को भी यह समस्या है।

कैसे करें बचाव

- धुएं और प्रदूषण से दूर रहे, मास्क लगा कर घर से बाहर निकलें।
- बहुत ठंडे और बंद कमरों में न रहें।

- सुबह शाम के समय सांस के मरीज बहर जाने से बचें।
- नियमित रूप से एनहेलर का उपयोग करें और डॉक्टर से परामर्श लेते रहें।

- प्रोटीन युक्त आहार लें और पर्याप्त पानी पिएं।
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