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Exclusive: गोरखपुर में जालसाजी के केस में पीड़ित को पुलिस दे रही 'धोखा'

Thu, 28 Jul 2022 12:01 PM IST
vivek shukla शिवम सिंह, गोरखपुर।

सार

एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि थानों में दर्ज केस की समीक्षा की गई। जालसाजी के कई मामलों की विवेचना लंबित है। विवेचना की निगरानी भी की जा रही है। अगर एक व्यक्ति ने कई लोगों से जालसाजी की है तो कई केस दर्ज किए जाएंगे।

 
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock
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विस्तार
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गोरखपुर में जालसाजों के चंगुल में फंसकर कीमती जमीन व रुपये गवां चुके लोगों को जांच के नाम पर पुलिस ‘धोखा’ दे रही है। एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने जिले में दर्ज केसों की समीक्षा की तो पता चला कि जालसाजी के मामलों की विवेचना में लापरवाही बरती जा रही है। 50 से अधिक मामलों में कार्रवाई की जगह लीपापोती की जा रही है।

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एसएसपी ने जल्द निपटारे का आदेश देते हुए एसपी रैंक के अफसरों को समीक्षा की जिम्मेदारी सौंप दी। इसका असर रहा कि बीते तीन दिनों में ही पुलिस ने चार आरोपियों को जेल भेजा है। जालसाजी का केस दर्ज कराने के लिए भी कठिन प्रक्रिया से गुजरना होता है। आवेदक पहले एसएसपी के पास फरियाद करता है, फिर थाने से रिपोर्ट लगती है। इसके बाद एफआईआर दर्ज होती है। इसके बावजूद लोगों को न्याय नहीं मिल पा रहा है।

जिले में 20 से अधिक मामले तो ऐसे हैं, जिसमें एक साल से अधिक समय से जांच चल रही है। फरियादी न्याय की आस में अफसरों के दफ्तरों का चक्कर काट रहे हैं। पुलिस की इसी लापरवाही को एसएसपी ने पकड़ा और सभी को सूचीबद्ध कर मॉनिटरिंग शुरू करा दी। अब देखना है कि नई पहल का असर कितना होता है।
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धारा हटाने व कमजोर करने का भी खेल

कई ऐसे मामले सामने आए, जिसमें कूटरचित दस्तावेज के इस्तेमाल का आरोप हैं। आईपीसी की 467 व 468 जैसी गंभीर धाराएं लगाई जाती हैं। लेकिन, कई केस में पुलिस विवेचना में इन धाराओं को साक्ष्य होने के बावजूद हटा देती है। जिस वजह से पीड़ित को न्याय नहीं मिल पाता और आरोपी की मदद बड़ी खामोशी से हो जाती है।

मुख्यमंत्री ने तरेरी थीं आंखें तो दबोचा गया था ओमप्रकाश
जालसाज ओमप्रकाश इसका बड़ा उदाहरण हैं। उसने 20 से अधिक लोगों से जालसाजी की थी, लेकिन पुलिसिया कार्रवाई न होने की वजह से रोजाना नए लोगों को ठगता था। जालसाजी की शिकार एक महिला मुख्यमंत्री के जनता दरबार में पहुंची तो पुलिस वाले हरकत में आए और ताबड़तोड़ 16 मुकदमे दर्ज किए गए। अलग से टीम गठित की गई और आरोपी पकड़ा गया। बाद में कैंट पुलिस ने उसकी संपत्ति जब्त कर ली।

अब हर पीड़ित की तहरीर पर दर्ज होगा केस
एसएसपी के मुताबिक, अगर एक ही शख्स अलग-अलग कई लोगों से जालसाजी करता है तो एक ही केस नहीं दर्ज होगा। हर पीड़ित से तहरीर ली जाएगी और अलग-अलग केस दर्ज किए जाएंगे। इससे अपराध की गंभीरता सामने आएगी। साथ ही जालसाज के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी। आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर गैंगस्टर की कार्रवाई भी हो सकेगी। इस संबंध में सभी थानाध्यक्षों को निर्देशित कर दिया गया था।

एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि थानों में दर्ज केस की समीक्षा की गई। जालसाजी के कई मामलों की विवेचना लंबित है। विवेचना की निगरानी भी की जा रही है। अगर एक व्यक्ति ने कई लोगों से जालसाजी की है तो कई केस दर्ज किए जाएंगे।
 
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केस- एक

जनवरी 2020 में गोला थाने में जमीन मामले में जालसाजी का केस दर्ज किया गया। सहदोडाड़ निवासी रण बहादुर चन्द ने केस दर्ज कराया था। एक बार फिर पुलिस ने इसमें फाइनल रिपोर्ट लगा दी। मामला एसएसपी के संज्ञान में आया तो दोबारा जांच शुरू की गई, लेकिन जांच अब भी लटकी हुई है।

केस- दो
फरवरी 2022 में गुलरिहा थाने में जालसाजी, धमकी देने की धारा में केस दर्ज किया गया। लालकरौना निवासी सुमित्रा ने केस दर्ज कराया। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज बनाकर उनकी जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई। घटना अगस्त 2019 की है। काफी दौड़ने के बाद केस तो दर्ज हो गया, लेकिन विवेचन अब तक पूरी नहीं हो पाई।

केस- तीन
2019 में कैंट थाने में दो भाइयों पर फर्जी एकाउंट खोलकर धोखाधड़ी करने का केस दर्ज किया गया था। इस प्रकरण में कार्रवाई में पुलिस आनाकानी कर रही थी। एसएसपी के आदेश पर कैंट पुलिस ने मंगलवार को आरोपी शमीम गिरफ्तार कर जेल भेजा है। अभी तक इसमें कार्रवाई नहीं की गई थी। एक और आरोपी वसीम अहमद को पहले ही गिरफ्तार करके जेल भेजा जा चुका है।
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