जघन्य अपराध के अभियुक्तों के जमानतदार तक भी पुलिस पहुंच रही है। एसएसपी के आदेश पर इसकी एक महीने पहले शुरुआत की गई है। पुलिस ऐसा पहले भी करती थी, लेकिन तब निगरानी नहीं होती थी। अब पुलिस जमानतदार के पास पहुंचकर उन पर होने वाली कानूनी कार्रवाई के बारे में बता रही है।
पुलिस बता रही है कि जिस बदमाश की आपने जमानत ली है, वह अगर दोबारा पकड़ा गया तो आप भी शरणदाता, आपराधिक साजिश जैसे अपराध के आरोपित बन सकते हैं। इसका असर यह हुआ कि हाल के दिनों में कई हिस्ट्रीशीटरों तक पुलिस जमानतदार की मदद से पहुंच सकी।
इसे भी पढ़ें: शोहदे नहीं, घरवालों से नाराज होकर किशोरी ने की थी खुदकुशी
गोरखपुर में हुई सजा का विवरण
- आजीवन कारावास- 111
- 20 वर्ष से अधिक की सजा- 1
- 10 वर्ष की सजा- 48
- सात वर्ष की सजा- 44
- सात वर्ष से कम की सजा- 155
4 मई 1999 को गोला इलाके के झरकटा गांव में शादी के दौरान ही छांगुर प्रसाद के दो बेटों नवनीत और आशुतोष को बदमाशों ने चाकुओं से गोद दिया था। बाद में इलाज के दौरान नवनीत की मौत हो गई। इस मामले में कोर्ट में तारीख पड़ रही थी। जज ने भी कई बार गवाह को हाजिर करने के लिए कहा, लेकिन हर बार पुलिस ध्यान नहीं देती थी। कुछ महीने पहले पुलिस इस मामले में सरकारी अधिवक्ता की मदद से पैरवी की तो सोमवार को अभियुक्त श्याम नारायन दुबे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
केस दो
18 अक्तूबर 1996 को बांसगांव इलाके के साईताल गांव निवासी गया प्रसाद शर्मा अपने भाई रामानंद शर्मा के साथ महादेव झारखंडी में किराए के कमरे में रहते थे। उस दिन दोनों भाई सब्जी लेने गिरधरगंज गए थे। इस दौरान पुरानी रंजिश को लेकर गांव के मधुसूदन शुक्ला, प्रजापति शुक्ला, गिरजा शंकर पांडेय, देवीसरन यादव ने बेरहमी से पीटा और रामानंद की हत्या कर शव को लेकर बस्ती चले गए। वहां से शव बरामद हुआ था। इस मामले में भी पुलिस ने पैरवी की तो एक हफ्ते पहले आजीवन कारावास की सजा हुई।
इसे भी पढ़ें: अमर उजाला के 75 साल, ये हैं पाठकों की ओर से चुने गए गोरखपुर-बस्ती मंडल के 75 नायक
केस तीन
30 जुलाई 2006 को शाहपुर के घोसीपुरवा में राजेश श्रीवास्तव की हत्या कर फेंकी गई लाश उनके दुकान के सामने मिली थी। घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने तलाश की तो शव बरामद हुआ था। पुलिस ने केस दर्ज कर घटना का पर्दाफाश करते हुए घोसीपुरवा निवासी फखरुद्दीन, पादरीबाजार के सुमित कुमार मिश्र, तिवारीपुर के सुशील कुमार को जेल भेजा था। लेकिन, इसके बाद पुलिस ने ध्यान नहीं दिया। अब पुलिस ने पैरवी की तो 24 मार्च को सभी को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
केस चार
नाबालिग से दुष्कर्म के अभियुक्त जगलाल निषाद पर साल 2019 में चौरीचौरा पुलिस ने दुष्कर्म और पॉक्सो का केस दर्ज कर जेल भेजा था। इस मामले की ऑपरेशन शिकंजा के तहत पुलिस ने पैरवी शुरू की तो 4 दिसंबर 2021 को कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये की सजा सुना दी।
एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि बदमाशों को जेल भेजने के साथ ही पुलिस कोर्ट में सरकारी अधिवक्ताओं की मदद से मुकदमों की पैरवी कर रही है। ऑपरेशन शिकंजा के तहत पुलिस की पैरवी की वजह से कई मामलों में अभियुक्तों को सजा मिली है। यह लगातार जारी रहेगा। इसकी निगरानी मैं खुद करता हूं।