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ऑपरेशन शिकंजा: पुलिस चाहती तो 20 साल का दर्द 20 दिन में मिटा देती, पैरवीकार बन कर रही मदद

Tue, 18 Apr 2023 02:56 PM IST
vivek shukla शिवम सिंह, गोरखपुर।

सार

एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि बदमाशों को जेल भेजने के साथ ही पुलिस कोर्ट में सरकारी अधिवक्ताओं की मदद से मुकदमों की पैरवी कर रही है। ऑपरेशन शिकंजा के तहत पुलिस की पैरवी की वजह से कई मामलों में अभियुक्तों को सजा मिली है। यह लगातार जारी रहेगा। इसकी निगरानी मैं खुद करता हूं।

 
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock
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विस्तार
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कहते हैं ना, पुलिस अगर चाहे तो कुछ कर सकती है। कुछ ऐसा ही ऑपरेशन शिकंजा में देखने को मिल रहा है। पुलिस गंभीर मामलों की पैरवीकार बन रही तो अभियुक्त को सजा दिलाकर 20 साल पुराने दर्द को चंद दिनों में मिटा दे रही। कोर्ट, जज, सरकारी अधिवक्ता सब तैयार हैं, लेकिन कमी थी तो सिर्फ पुलिस की रुचि की।

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अब अभियान के तहत पुलिस अधिकारी लगातार माॅनीटरिंग कर रहे हैं तो फिर आजीवन कारावास तक की सजा भी हो रही। पुलिस बीते साल 2022 में 138 से अधिक अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा दिलाने में सफल रही है।

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जानकारी के मुताबिक, पुलिस जब मामलों पर ध्यान नहीं देती है और वादी आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं तो इसका फायदा अभियुक्तों को मिलता है। पैरवी के अभाव में अभियुक्त बरी तक हो जाता है। इस तरह के मामले बढ़ने के बाद पुलिस ने ऑपरेशन शिकंजा चलाने का फैसला किया।

पैरवी में पुलिस कमजोर न पड़े इसके लिए आईजी जे. रविंद्र और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर खुद हर महीने बड़े मामलों की समीक्षा करते हैं। साथ ही सभी एसपी और सीओ को केस बांट दिए हैं, ताकि कमी मिलने पर उनसे सीधा सवाल जवाब हो सके। अभियान की सफलता को देखते हुए ही आईजी ने हर दरोगा को दो मामलों की पैरवी का आदेश भी दिया। इसके बाद से कार्यालय में तैनात दरोगा भी ऑपरेशन शिकंजा में मददगार बने हैं।

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जमानत भी निरस्त करा रही पुलिस

जघन्य अपराध के अभियुक्तों के जमानतदार तक भी पुलिस पहुंच रही है। एसएसपी के आदेश पर इसकी एक महीने पहले शुरुआत की गई है। पुलिस ऐसा पहले भी करती थी, लेकिन तब निगरानी नहीं होती थी। अब पुलिस जमानतदार के पास पहुंचकर उन पर होने वाली कानूनी कार्रवाई के बारे में बता रही है।

पुलिस बता रही है कि जिस बदमाश की आपने जमानत ली है, वह अगर दोबारा पकड़ा गया तो आप भी शरणदाता, आपराधिक साजिश जैसे अपराध के आरोपित बन सकते हैं। इसका असर यह हुआ कि हाल के दिनों में कई हिस्ट्रीशीटरों तक पुलिस जमानतदार की मदद से पहुंच सकी।

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गोरखपुर में हुई सजा का विवरण
  • आजीवन कारावास- 111
  • 20 वर्ष से अधिक की सजा- 1
  • 10 वर्ष की सजा- 48
  • सात वर्ष की सजा- 44
  • सात वर्ष से कम की सजा- 155

 
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केस एक

4 मई 1999 को गोला इलाके के झरकटा गांव में शादी के दौरान ही छांगुर प्रसाद के दो बेटों नवनीत और आशुतोष को बदमाशों ने चाकुओं से गोद दिया था। बाद में इलाज के दौरान नवनीत की मौत हो गई। इस मामले में कोर्ट में तारीख पड़ रही थी। जज ने भी कई बार गवाह को हाजिर करने के लिए कहा, लेकिन हर बार पुलिस ध्यान नहीं देती थी। कुछ महीने पहले पुलिस इस मामले में सरकारी अधिवक्ता की मदद से पैरवी की तो सोमवार को अभियुक्त श्याम नारायन दुबे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

केस दो
18 अक्तूबर 1996 को बांसगांव इलाके के साईताल गांव निवासी गया प्रसाद शर्मा अपने भाई रामानंद शर्मा के साथ महादेव झारखंडी में किराए के कमरे में रहते थे। उस दिन दोनों भाई सब्जी लेने गिरधरगंज गए थे। इस दौरान पुरानी रंजिश को लेकर गांव के मधुसूदन शुक्ला, प्रजापति शुक्ला, गिरजा शंकर पांडेय, देवीसरन यादव ने बेरहमी से पीटा और रामानंद की हत्या कर शव को लेकर बस्ती चले गए। वहां से शव बरामद हुआ था। इस मामले में भी पुलिस ने पैरवी की तो एक हफ्ते पहले आजीवन कारावास की सजा हुई।

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केस तीन
30 जुलाई 2006 को शाहपुर के घोसीपुरवा में राजेश श्रीवास्तव की हत्या कर फेंकी गई लाश उनके दुकान के सामने मिली थी। घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने तलाश की तो शव बरामद हुआ था। पुलिस ने केस दर्ज कर घटना का पर्दाफाश करते हुए घोसीपुरवा निवासी फखरुद्दीन, पादरीबाजार के सुमित कुमार मिश्र, तिवारीपुर के सुशील कुमार को जेल भेजा था। लेकिन, इसके बाद पुलिस ने ध्यान नहीं दिया। अब पुलिस ने पैरवी की तो 24 मार्च को सभी को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

केस चार
नाबालिग से दुष्कर्म के अभियुक्त जगलाल निषाद पर साल 2019 में चौरीचौरा पुलिस ने दुष्कर्म और पॉक्सो का केस दर्ज कर जेल भेजा था। इस मामले की ऑपरेशन शिकंजा के तहत पुलिस ने पैरवी शुरू की तो 4 दिसंबर 2021 को कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये की सजा सुना दी।

एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि बदमाशों को जेल भेजने के साथ ही पुलिस कोर्ट में सरकारी अधिवक्ताओं की मदद से मुकदमों की पैरवी कर रही है। ऑपरेशन शिकंजा के तहत पुलिस की पैरवी की वजह से कई मामलों में अभियुक्तों को सजा मिली है। यह लगातार जारी रहेगा। इसकी निगरानी मैं खुद करता हूं।

 
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