फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pithori Amavasya 2021: जानिए कब है पिठोरी अमावस्या, क्यों है इस अमावस्या का विशेष महत्व

Mon, 06 Sep 2021 02:42 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

पिठोरी अमावस्या के दिन मां दुर्गा सहित 64 देवियों की आटे से मूर्तियां बनाते हैं। महिलाएं इस दिन आटे से बनी देवियों की पूजा-अर्चना करती हैं और व्रत रखती हैं। 
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भाद्रपद मास की अमावस्या सात सितंबर सोमवार को है। इस अमावस्या को पिठौरी अमावस्या और कुशग्रहणी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस दिन स्नान, दान और पितरों के लिए तर्पण करना शुभकारी और मंगलकारी माना जाता है। पिठौरी अमावस्या के दिन महिलाएं अपने पति और बच्चों के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन मां दुर्गा की पूजा का विधान है।
विज्ञापन


पिठोरी अमावस्या का महत्व
पिठोरी अमावस्या के दिन मां दुर्गा सहित 64 देवियों की आटे से मूर्तियां बनाते हैं। महिलाएं इस दिन आटे से बनी देवियों की पूजा-अर्चना करती हैं और व्रत रखती हैं। इसलिए इसे पिठोरी अमावस्या कहते हैं। अमावस्या के दिन दान, तप और स्नान का विशेष महत्व है। स्नान के बाद पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पूजन विधि
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें। नदियों में स्नान से बचें क्योंकि इन दिनों नदियों में बाढ़ आई हुई है। ऐसे में घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान करने के बाद घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। सूर्य देव को अर्घ्य दें। पितरों के निमित्त तर्पण और दान करें। भगवान विष्णु और महादेव की विधि-विधान से पूजन अर्चन के साथ दान पुण्य करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें