गोरखपुर विश्वविद्यालय के बॉयोटेक्नोलॉजी विभाग की शिक्षिका डॉ. स्मृति मल्ल की निगरानी में फाइटो प्लाज्मा पर शोध कार्य वर्ष 2018 से चल रहा है। बैगन, टमाटर, मिर्च, गेंदे के फूल, अनार आदि के पौधे पर शोध किया गया। इसमें पाया गया कि फाइटो प्लाज्मा का जीवाणु लगते ही उसकी पत्तियां पीली और सिकुड़ने लगती हैं।
इस रोग से ग्रसित होने के शुरुआती दौर में ही पैाधे की टहनी को काट कर हटा दें तो अन्य पौधों को खराब होने से बचाया जा सकता है। इस रोग के लगते ही कीटनाशक टेट्रासाइक्लीन एंटीबॉयोटिक का छिड़काव कारगर है। लेकिन, इसका असर कम होते ही जीवाणु फिर से तेजी से हमला करता है।
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गोविवि बॉयोटेक्नोलॉजी विभाग की शिक्षिका डॉ. स्मृति मल्ल ने कहा कि पौधों में फाइटो प्लाज्मा की रोकथाम के लिए निरंतर निगरानी के साथ आवश्यक उपाय जरूरी है। इसको लेकर किसानों को भी जागरूक किया जा रहा है। फसलों पर फाइटो प्लाज्मा जनित रोग का नियंत्रण पाकर किसानों की आय बढाई जा सकती है।