इसके अलावा कुछ मामलों में साइबर अपराधी पॉर्न साइट विजिट करने या सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अपनी फोटो पब्लिक रखने वालों की तस्वीरों व वीडियो का दुरुपयोग कर सेक्सटॉर्शन करते हैं। बदनामी के डर से लोग शिकायत दर्ज नहीं कराते।
उप निरीक्षक साइबर क्राइम थाना उपेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि इस तरह के कॉल राजस्थान के मेवात और भरतपुर, हरियाणा और दिल्ली के दूरदराज के क्षेत्रों में बैठे गिरोह की तरफ से आते हैं। उन्होंने कहा कि वीडियो कॉल में दिखने वाली महिला प्रत्यक्ष रूप से मौजूद नहीं रहती है। बल्कि, गिरोह द्वारा अन्य डिवाइस से इस तरह की वीडियो चलाई जाती है। फिर आपका वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस तरह के मामलों में वीडियो कॉल न उठाएं और घबराने के बजाय साइबर थाने में शिकायत करें। ऐसे मामलों की शिकायत पुलिस द्वारा दर्ज न होकर ऑनलाइन साइबर क्राइम की साइट पर होती है।
सोशल प्लेटफार्म पर सतर्कता से होगा बचाव
उप निरीक्षक, साइबर थाना उपेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के इस्तेमाल के दौरान सतर्कता बरतने की जरूरत है। अनजान लिंक को न खोलें। अंजान लोगों से वीडियो कॉल करने से बचें। अगर ऐसी कोई शिकायत हो तो रुपये देने की बजाए पुलिस से संपर्क करें ताकि पीड़ित को ब्लैकमेलिंग से बचाया जा सके। इस पूरी कवायद में साइबर क्राइम पुलिस लोगों की निजता का पूरा ध्यान रखती है।
सेक्सटॉर्शन के मामले में महिलाओं के अपेक्षा पुरुष ज्यादा शिकार होते हैं। हालांकि, महिलाओं को ही हथकंडा बनाकर यह अपराध किया जाता है। ऐसे अपराधों के शिकार सभी आयु वर्ग के लोग होते हैं। महिलाएं अपनी ऑनलाइन गतिविधियों को लेकर अधिक सतर्क रहती हैं। इस कारण वह इसकी शिकार कम होती हैं।
उदाहरण के लिए इन केसों को पढ़िए...
केस 1
रुस्तमपुर के रहने वाले हरिकेश सिंह (काल्पनिक नाम) को होली के कुछ दिन पहले व्हॉट्सएप पर एक अनजान नंबर से अश्लील मैसेज आता है। उन्होंने जैसी ही मैसेज का जवाब दिया, उधर से वीडियो कॉल आने लगी। हरिकेश ने कॉल उठाई तो स्क्रीन पर नग्न अवस्था में महिला दिखाई दी। इसके बाद हरिकेश ने फोन काट दिया। फिर कुछ देर बाद उनके फोन पर दूसरे नंबर से वीडियो मैसेज आया और कुछ रुपये देने की मांग की गई। रुपये न देने पर अश्लील वीडियो को रिश्तेदारों और दोस्तों को भेजने और यूट्यूब पर वायरल करने की धमकी दी गई। हरिकेश ने गिरोह के खाते में डेढ़ लाख रुपये जमा कर दिए।
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केस 2
तिवारीपुर निवासी अखिलेश ( काल्पनिक नाम) के साथ भी शुरुआत में यही हुआ। उन्होंने भी फोन उठाया, बात की और फिर वीडियो के जरिये ब्लैकमेल किए गए। इस बात को घरवालों से साझा करने में भी वह संकोच करने लगे। संकोच के कारण वह गिरोह द्वारा लाखों रुपए के ठगी के शिकार हुए। कभी यूट्यूब कर्मी, तो कभी विभाग का अधिकारी बन कर आरोपियों ने उनसे रुपये ऐंठे।