गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) में पिछले पखवारे भर के भीतर ही अफसरों, कर्मचारियों की कार्यशैली में आए बदलाव को देख लोगों में भी भरोसा जगने लगा है। छोटी-छोटी कमियों के लिए दौड़ाए जाने से तंग आकर जहां तमाम लोगों ने मानचित्र के लिए आवेदन करना ही बंद या कम कर दिया था वहीं अब तेजी से लोग आगे आ रहे हैं। आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। एक अगस्त से 15 अगस्त के बीच मानचित्र के आनलाइन आवेदनों की संख्या में करीब तीन गुनी वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान 83 मामले आए जिनमें से 46 के मानचित्र स्वीकृत हो गए। बाकी की स्वीकृति के लिए प्रक्रिया तेजी से चल रही है। एक जुलाई से 15 जुलाई के बीच 29 आवेदन आए थे जिनमें से 15 स्वीकृत हुए।
यह बदलाव नवागत उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह की सख्ती के बाद देखने को मिल रहा है। मानचित्र और नामांतरण के मामलों को लेकर सर्वाधिक लोग परेशान रहते हैं। उन्होंने कार्यभार संभालते ही सबसे पहले ऐसे आवेदकों को ही राहत दिलाने की दिशा में प्रयास शुरू किया। कैंप लगाए। लोगों को फोन कर प्राधिकरण बुलाया।
फरियादियों को सम्मान देने के साथ तुरंत निस्तारित होने वाले मामलों में समय नहीं लगाने की अभियंताओं और कर्मचारियों में कार्यपद्धति विकसित की। नतीजा यह रहा कि एक से 21 साल तक के लटके मानचित्र और नामांतरण के मामले चंद घंटों और दिनों में निस्तारित हुए। इससे जीडीए को भी 20 करोड़ रुपये की आय हुई। मानचित्र के आवेदन बढ़ने से अवैध निर्माण पर तो रोक लगेगी ही प्राधिकरण की भी आय में इजाफा होगा।