500 बेड के बाल रोग संस्थान में बच्चों के लिए सभी सुविधाएं मौजूद हैं। इनमें नियोनेटल इंटेसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) और पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) के बेड बने हैं। ऑक्सीजन से लेकर अन्य सुविधाएं भी हैं। इस वार्ड में गंभीर रूप से बीमार बच्चों का भी इलाज हो सकेगा।
वार्ड में कोरोना मरीजों का चल रहा था इलाज
कोरोना की पहली लहर में जब मरीजों की संख्या बढ़ी तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने 500 बेड के बाल रोग संस्थान को कोरोना वार्ड बना दिया। पहली लहर से लेकर दूसरी और तीसर लहर के बीच इस वार्ड में 200 बेड में आईसीयू की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। इसमें गंभीर कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा था।
अलग-अलग वार्ड में चल रहा है बच्चों का इलाज
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अभी अलग-अलग वार्ड में बच्चों का इलाज हो रहा है। 100 नंबर वार्ड से लेकर हाई डिफेंसिव यूनिट (एचडीयू), नियोनेटल इंटेसिव केयर यूनिट और पीडियाट्रिक इंटेसिव यूनिट चल रहे हैं। ज्यादातर वार्ड फुल रहते हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में नेपाल, बिहार के गोपालगंज, सिवान, चंपारण, बेतिया, मुजफ्फरपुर सहित पूर्वांचल के आजमगढ़, मऊ, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, देवरिया, महराजगंज, बलरामपुर जैसे जिलों से मरीज आते हैं। इस वर्ष अब तक 59 जेई और एईएस के मरीजों का इलाज किया गया।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने कहा कि बाल रोग संस्थान बनकर तैयार है। डीएम ने गुणवत्ता जांच के लिए कमेटी बनाई है। कमेटी कमियों को देखेगी, फिर रिपोर्ट देगी। अगर कोई कमियां रह जाती हैं तो उसे ठीक कराया जाएगा। अभी भवन भी हैंडओवर नहीं हुआ है। जैसे ही प्रक्रिया पूरी होगी, बाल रोग संस्थान का संचालन किया जाएगा।