सरकारी अस्पतालों में ओपीडी के समय अगर डॉक्टर से मिलने एमआर (मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव) पहुंचे तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। डीएम ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं। नोडल बनाए गए अधिकारी सरकारी अस्पतालों में जांच के दौरान यह देखेंगे कि कोई एमआर तो ओपीडी के आसपास भटक नहीं रहा है।
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दरअसल, प्रशासन को यह शिकायत मिली थी कि ओपीडी के समय बहुत सारे एमआर पहुंच जाते हैं और डॉक्टर उन्हें ज्यादा समय देते हैं। उनके प्रभाव में आकर निजी कंपनियों की दवाएं भी लिखी जाती हैं। इसके बाद डीएम ने जांच कराने का निर्देश नोडल अधिकारियों को दिया है।
डीएम कृष्णा करुणेश ने कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज व दवाओं की उपलब्धता की जांच के लिए नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। सभी को रोजाना पांच अस्पतालों की जांच कर रिपोर्ट देनी है। यह अभियान एक महीने तक चलेगा। अगर कहीं दलाल व बाहरी तत्वों की सक्रियता मिलती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।