भगवान विष्णु (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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परिवर्तिनी एकादशी का पर्व 17 सितंबर शुक्रवार को मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी या पद्म एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन के स्वरूप की पूजा की जाती है।
परिवर्तिनी एकादशी का महत्व
पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार, धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु चार महीनों तक सोते हैं, ये चार माह चतुर्मास कहलाते है। भाद्रपाद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु सोते हुए करवट लेते हैं इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा सुनी जाती है। इस व्रत को करने वाले भक्तों पर भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और उन्हें उनकी विशेष कृपा मिलती है।
ऐसे करें पूजन
पंडित अवधेश मिश्रा के अनुसार, ब्रह्ममुहूर्त में उठकर नित्यकर्मों से निवृत हो जाएं। स्नान करने के बाद पूजा घर की साफ-सफाई करें। भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा के लिए उनकी तस्वीर के समक्ष दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें। उनका अभिषेक करें, फिर चंदन, सिंदूर, फूल आदि से पूजा करें और उन्हें प्रसाद चढ़ाएं। फिर दिन भर व्रत रखें। अगले दिन ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान-पुण्य करें। फिर व्रत का पारण करें।