फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गोरखपुर विश्वविद्यालय: कर्ज में जिंदगी, उधार पर जल रहे घरों के चूल्हे

Tue, 27 Dec 2022 11:18 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।

सार

गोरखपुर विश्वविद्यालय में निजी एजेंसी के माध्यम से कुशल और अकुशल श्रेणी के 294 कर्मचारी रखे गए हैं। कुशल श्रेणी के कर्मचारियों को 13,789 रुपये प्रति माह और अकुशल श्रेणी के कर्मचारियों को 11,190 रुपये प्रति माह मिलते हैं।
विज्ञापन
DDU gorakhpur - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में कार्यरत करीब 294 आउटसोर्स कर्मचारियों को सात महीने से मानदेय नहीं मिला है। अब इनकी जिंदगी कर्ज के भंवर में फंस गई है। उधार पर इनके घर के चूल्हे जल रहे हैं। मानदेय भुगतान के संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से हर महीने आश्वासन ही दिया जाता है।

विज्ञापन


गोरखपुर विश्वविद्यालय में निजी एजेंसी के माध्यम से कुशल और अकुशल श्रेणी के 294 कर्मचारी रखे गए हैं। कुशल श्रेणी के कर्मचारियों को 13,789 रुपये प्रति माह और अकुशल श्रेणी के कर्मचारियों को 11,190 रुपये प्रति माह मिलते हैं। इस राशि में पीएफ की भी कटौती की जाती है।

पिछले कई सालों से एजेंसी ने कर्मचारियों की पीएफ की राशि जमा नहीं की थी। इसकी जांच विश्वविद्यालय प्रशासन करा रहा है। वहीं, नई व्यवस्था के तहत आउटसोर्स पर रखे गए कर्मचारियों की ड्यूटी का सत्यापन कराने के लिए कहा गया। इस मामले में मानदेय का भुगतान लटका दिया गया।
विज्ञापन


 

विज्ञापन

कर्ज में डूबे हैं कई कर्मचारी

अब व्यवस्था नई एजेंसी को दी गई है। ड्यूटी का सत्यापन हो रहा है, लेकिन मानदेय नहीं दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय के मीडिया एवं जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि मानदेय के भुगतान की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। सप्ताह भर में सभी आउटसोर्स कर्मचारियों के बकाया मानदेय का भुगतान कर दिया जाएगा।  

परिवार के भरण पोषण के लिए कई कर्मचारियों ने कर्ज लिए हैं। कुछ कर्मचारी रुपये उधार लेकर राशन-पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। प्रशासनिक भवन में तैनात एक कर्मचारी ने बताया कि अब तक 30 हजार रुपये का कर्ज ले चुका हूं। समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करूं?

आउटसोर्स के माध्यम से माली पद पर कार्यरत मोती निषाद की पिछले माह मौत हो गई। परिवार वालों का आरोप था कि इलाज के लिए रुपये नहीं थे। छह दिन अस्पताल में भर्ती थी, दूसरों से कर्ज लेना पड़ा था। डिस्चार्ज कराकर घर ले आए और मोती की सांसें थम गईं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें