पंचायत चुनाव की ड्यूटी के दौरान कोरोना से संक्रमित होकर जान गंवाने वाले बेसिक शिक्षा विभाग के 53 शिक्षक, शिक्षामित्र और अनुदेशकों के आश्रितों में से महज छह आश्रितों को ही अब तक नौकरी मिली है, जबकि दो आश्रितों की नियुक्ति का मामला प्रक्रियाधीन है। दरअसल, इसके पीछे विभाग नहीं, मृतक आश्रितों की उदासीनता वजह है। बेसिक शिक्षा विभाग ने इन्हें पत्र प्रेषित कर शैक्षणिक दस्तावेज जमा कराने को कहा है।
विभाग का दावा है कि जीपीएफ भुगतान का कार्य पूरा किया जा चुका है। साथ-साथ ही पेंशन से जुड़े कागजात को अग्रसारित करते हुए ट्रेजरी में भेज दिया गया है। जल्द ही इसे भी पूरा करा लिया जाएगा। नियुक्ति के मामलों में आश्रितों की ओर से दस्तावेज नहीं उपलब्ध कराए गए हैं। उन्हें पूर्व में पत्र प्रेषित कर दस्तावेज उपलब्ध कराने का कहा गया है। जल्द ही एक और पत्र प्रेषित किया जाएगा।
कोविड महामारी के दौरान आयोजित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की वजह से जिले के कई शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को संक्रमित होने की वजह से जान गंवानी पड़ी थी। पहले तो विभाग ने शिक्षकों के निधन को कोविड की वजह से मानने से इंकार कर दिया था, मगर बाद में शिक्षक संगठनों के दबाव के चलते सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा। जिसके बाद शिक्षकों के जीपीएफ, पेंशन और आश्रितों को नौकरी दिलाने की प्रक्रिया बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से शुरू की गई।
आवेदन को लेकर उदासीनता
कोविड महामारी के चलते जान गंवाने वाले शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के आश्रितों को नौकरी देने के लिए विभाग को आवेदन ही बेहद कम मिले हैं। जिस वजह से उनकी नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया लंबित है। सभी आश्रितों को पूर्व में विभाग ने पत्र प्रेषित कर दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है, मगर इसके बाद भी आवेदन नहीं आ रहे हैं।