इसका परिणाम यह हुआ कि भौकाल जमाने के लिए कई लोगों के असलहे के साथ के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। पुलिस ने इनमें से कई को जेल भिजवाया। इस तरह के मामलों में देखा गया कि ज्यादातर पुराने फोटो व वीडियो ही सामने आए, जिसे किसी विरोधी ने वायरल कर दिया था।
पुलिस व प्रशासन की सख्ती का असर है कि अब लोग नया लाइसेंस बनवाना तो दूर की बात है, पुराने से छुटकारा पाने की जुगत में लगे हैं। गन हाउस पर असलहा जमा करने वाले 5700 से अधिक लोग अब वापस लेने नहीं जा रहे हैं।
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दुकानदार अपने एक कर्मचारी की मदद से रोजाना ही रजिस्टर देकर ऐसे लोगों को फोन कराते हैं, ताकि वे आकर असलहा ले जाएं जिससे उनकी दुकान खाली हो जाए। लेकिन कई लोग कहने के बाद नहीं आते हैं तो कई फोन ही नहीं उठाते हैं। अब वह भी जानते हैं कि अगर असलहा लेने गए तो किराया और सर्विसिंग चार्ज ही इतना हो जाएगा कि कोई फायदा नहीं।
केस एक
बेटा बोला- नहीं चाहिए असलहा
रामगढ़ताल इलाके के रानीबाग के पास रहने वाले सिद्धार्थ पांडेय के पिता के नाम से डबल बैरल बंदूक थी। पिता ठेकेदार रह चुके हैं। अब उनकी उम्र काफी ज्यादा हो चुकी है। उन्होंने बेटे से लाइसेंस अपने नाम कराने को कहा तो उसने मना कर दिया। कहा कि वह प्राइवेट काम करता है, उसे असलहे की कोई जरूरत नहीं है। उसने असलहे को जमा कर दिया है और लाइसेंस निरस्त कराने का आवेदन दिया है।