वाटर बॉडी में फिर गंदगी न फैले इसके लिए नैनो बबल तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस जापानी तकनीक के माध्यम से पानी में आक्सीजन की मात्रा बढ़ा दी जाएगी। गोरखपुर विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रमुख रहे प्रो. डीके सिंह का कहना है कि ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ने से पानी साफ हो जाता है। विदेशों में वाटर बॉडी का साफ बनाए रखने में इस तकनीक का खूब इस्तेमाल किया जाता है। देश के भीतर कई बड़े शहरों में इसके इस्तेमाल हो रहा है। इससे मछलियों के लिए भी पानी अनुकूल हो जाता है और तालाब की खूबसूरती भी बरकरार रहेगी।
वाटर बॉडी में म्यूजिकल फाउंटेन लगेगा, चारो तरफ बनेगा पाथ वे
पिछले महीने हुई जीडीए अवस्थापना समिति की बैठक में वाटर बॉडी के सुंदरीकण के लिए दो करोड़ रुपये खर्च करने के प्रस्ताव का मंजूरी दे दी गई है। प्राधिकरण द्वारा तैयार कार्ययोजना के मुताबिक 8.5 एकड़ क्षेत्रफल में इसे विकसित किया जाएगा। इसमें दो म्यूजिकल फाउंटेन बनाए जाएंगे। चारो ओर पाथ वे बनेगा और उसपर रेलिंग लगाई जाएगी। लोग वहां सुबह-शाम वॉक कर सकेंगे।
दीवार पर संदेश देने वाले चित्र बनाए जाएंगे। पुल के नीचे के भाग को भी सुंदर बनाया जाएगा। जगह-जगह सेल्फी प्वाइंट भी बनाए जाएंगे। बृहस्पतिवार को मंदिर में विकास कार्यों की बैठक के दौरान जीडीए उपाध्यक्ष ने इस कार्ययोजना को मुख्यमंत्री के सामने भी प्रस्तुत किया जिसपर उन्होंने भी अपनी सहमति दे दी। जल्द ही इसका टेंडर कर दिया जाएगा। दूसरे चरण में पूरी वाटर बॉडी को पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जाएगा।