गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) में 7.5 एमएलडी क्षमता के कामन एंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की स्थापना को अनुमति मिलने के बाद अब इसके संचालन पर भी मंथन शुरू हो गया है। तय हुआ कि संचालन के लिए एक स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) का गठन करना होगा।
गीडा के सीईओ पवन अग्रवाल ने बुधवार को इस संबंध में गीडा सभागार में उद्यमियों के साथ बैठक की। संचालन के लिए एमओयू की रूपरेखा भी तैयार की जा चुकी है और जल्द ही एमओयू पर हस्ताक्षर कर दिया जाएगा। एसपीवी में उद्यमी शामिल होंगे। बैठक में उन्हीं उद्यमियों को बुलाया गया था, जिनके यहां पानी का प्रयोग किया जाता है। ऐसी करीब 55 इकाइयां गीडा में हैं, उनमें से करीब 25 उद्यमी बैठक में उपस्थित रहे। सीईओ गीडा ने बताया कि नमामि गंगे परियोजना के तहत गीडा में सीईटीपी लगाने की सहमति प्राप्त हो चुकी है।
बैठक में मौजूद लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष दीपक कारीवाल ने कहा कि गीडा की स्थापना के समय ही यह बात तय थी कि गीडा की ओर से सीईटीपी स्थापित किया जाएगा। इसलिए इसकी स्थापना में उद्यमियों से आर्थिक अंशदान लेना उचित नहीं है। दीपक कारीवाल ने बताया कि इस मामले में उद्यमियों को सकारात्मक आश्वासन मिला है। बैठक में चेंबर आफ इंडस्ट्रीज के महासचिव प्रवीण मोदी, लघु उद्योग भारती के महासचिव महेश कुमार रूंगटा, कोषाध्यक्ष आशीष खेतान, सदस्य संतोष पारीख, उमेश छापड़िया आदि उद्यमी मौजूद रहे।
93 करोड़ की लागत से स्थापित होगा सीईटीपी
सीईटीपी की स्थापना करीब 93.52 करोड़ रुपये की लागत से होगी। इसकी 50 प्रतिशत धनराशि नमामि गंगे की ओर से, 25 प्रतिशत धनराशि राज्य सरकार की ओर से तथा शेष 25 प्रतिशत धनराशि उद्यमियों एवं गीडा को संयुक्त रूप से वहन करनी होगी।