महिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. एनके श्रीवास्तव ने बताया कि डॉक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि जन्म के तत्काल बाद बच्चों के आंख, नाक और कान की जांच की जाए। दिक्कत होने पर विशेषज्ञों के पास इलाज के लिए भेजा जाए।
बच्चों के लिए एक से तीन साल का वक्त बेहद अहम
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि अगर नवजात बच्चों के नाक, कान और आंख से जुड़ी बीमारियों का सही समय पर पता लग जाए तो इलाज संभव है। इसके लिए एक से तीन साल का वक्त बेहद अहम होता है। इलाज के बाद 70 से 80 फीसदी रिकवरी हो सकती है, लेकिन ऐसे मामलों में माता-पिता को जानकारी बाद में होती है।
इशारा करें, बच्चा न समझे तो डॉक्टर को दिखाएं
डॉ. भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि बच्चे को इशारे से बुलाएं अगर इशारा करने पर कोई रिस्पांस न दें, तो डॉक्टर को दिखाएं। इसके अलावा हाथ उठाने पर यदि बच्चे की नजर इधर-उधर न हो, आवाज सुनकर वह सिर इधर-उधर न करें, मोबाइल और टीवी की आवाज पर भी कोई प्रतिक्रिया न हो तो बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाए। क्योंकि, ऐसे बच्चों का सही समय पर इलाज होता है तो ठीक होने की संभावना 80 फीसदी रहती है।