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Exclusive: अस्पताल मालिक के बेटे पर दुष्कर्म और जबरन गर्भपात कराने का मुकदमा दर्ज, जानिए क्या है पूरा मामला

Thu, 30 Dec 2021 01:06 PM IST
vivek shukla रोहित सिंह, गोरखपुर।

सार

युवती का आरोप है कि अस्पताल मालिक के बेटे ने एक साल पहले घटना को अंजाम दिया था। उसने पुलिस पर एफआईआर में गलत उम्र लिखने का आरोप लगाया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर शहर के एचएन सिंह चौराहा स्थित न्यू प्रकाश अस्पताल के मालिक के बेटे सौरभ तिवारी के खिलाफ शाहपुर थाने में दुष्कर्म व जबरन गर्भपात कराने का मुकदमा दर्ज हुआ है। अस्पताल में काम करने वाली एक युवती का आरोप है कि एक वर्ष पहले सौरभ ने धोखे से शारीरिक संबंध बनाया। जब गर्भ ठहरने की जानकारी मिली, तो गर्भपात करा दिया।

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जानकारी के मुताबिक, मुकदमा 18 दिसंबर को दर्ज हुआ है। युवती ने जो तहरीर दी थी, उसके मुताबिक वह एक वर्ष पहले अस्पताल में काम करती थी। इसी दौरान अस्पताल संचालक के बेटे सौरभ से जान-पहचान हुई। सौरभ ने एक दिन प्यार का इजहार किया और अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके जबरन शारीरिक संबंध बनाना शुरू कर दिया। इसका वीडियो व फोटो भी बना लिया। इसके बाद ब्लैकमेल करके शारीरिक संबंध बनाता रहा।

28 अक्तूबर 2021 को पता चला कि गर्भवती हो गई हूं। इसकी जानकारी जब सौरभ तिवारी को दी तो उसने कहा कि बच्चा गिरा दो। इससे इनकार किया तो जबरदस्ती दवा खिला दी। दवा खाने के बाद तबीयत बिगड़ गई और गर्भपात हो गया। अस्पताल कर्मी रितेश और दिवाकर से उपचार कराया गया। ठीक होने के बाद अस्पताल से बाहर कर दिया गया। साथ ही जुबान खोलने पर जान से मारने की धमकी दी गई। घटना की जानकारी उस वक्त भी पुलिस को दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। इस सिलसिले में आरोपी का पक्ष नहीं मिल सका है। पक्ष मिलते ही प्रकाशित किया जाएगा।  

गलत उम्र लिखने का आरोप

युवती ने पुलिस पर उम्र गलत लिखने का आरोप लगाया है। उसका आरोप है कि मेडिकल जांच (एक्सरे व अन्य दस्तावेजों) में उम्र 21 वर्ष लिखी है। जबकि, एफआईआर में जन्म वर्ष 1996 लिख दिया।  पुलिस को 25 फरवरी 2000 जन्मतिथि बताई थी। पीड़िता का आरोप है कि एसएसपी से चार बार मिली थी, तब जाकर मुकदमा दर्ज हुआ।

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थानाध्यक्ष शाहपुर संजय कुमार सिंह ने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया है। देरी के आरोप निराधार हैं। आरोपित की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। कोर्ट बंद होने की वजह से मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान नहीं हो सका है।  

विवेचनाधिकारी नजर इमाम ने बताया कि 18 दिसंबर को मुकदमा दर्ज किया गया था। 19 दिसंबर को मेडिकल कराया गया। पीड़िता का बयान दर्ज करा लिया गया है। जल्द ही मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराया जाएगा।

आईपीसी की इन धाराओं में सजा का प्रावधान

313: आजीवन कारावास या एक अवधि के लिए कारावास की सजा।

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376: आजीवन कारावास या फांसी की सजा।
506: दो वर्ष तक कारावास व कानूनन सजा का प्रावधान।

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