लीज पर ट्रेन चलाने के लिए पूर्वोत्तर रेलवे में आवेदकों का इंतजार किया जा रहा है। अब तक एक भी आवेदन नहीं आया। लिहाजा अब रेल प्रशासन प्रचार-प्रसार पर जोर देने जा रहा है। भारत गौरव ट्रेन चलाने के लिए बोर्ड ने इंडियन रेलवे की वेबसाइट पर भारत गौरव ट्रेन नाम से पोर्टल जारी कर दिया है। ट्रेन का संचालन कोई भी व्यक्ति या संस्था कर सकती है। इसके लिए व्यक्ति या संस्था को ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
रेलवे बोर्ड से लौटने के बाद पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन के अधिकारियों ने इस ट्रेन के संचालन के लिए जन सहभागिता बढ़ाने को लेकर मंथन शुरू किया है। बुधवार को बैठक कर बिजनेस डवलपमेंट यूनिट (बीडीयू) को प्रचार-प्रसार कर और लोगों को जोड़ने की जिम्मेदारी दे दी गई। रेलवे वाणिज्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पोर्टल पर रोजाना चेक कराया जा रहा है, एक भी आवेदन नहीं आया है। न ही किसी ने अभी तक संपर्क किया है।
ट्रेनों के संचालन में आम लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित करने के लिए रेल मंत्रालय ने देशभर के धार्मिक और पर्यटक स्थलों के बीच भारत गौरव ट्रेन चलाने की योजना तैयार की है। यह ट्रेन इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कार्पोरेशन आइआरसीटीसी की भारत दर्शन यात्रा ट्रेन की तर्ज पर चलाई जाएगी।
रेल लाइन, संचालन की जिम्मेदारी, लोको पायलट और गार्ड तो रेलवे के होंगे। कोच और संचालन के अलावा अन्य जिम्मेदारी व्यक्ति या संस्था की होगी। दो साल के लीज पर 14 से 20 कोच मिलेंगे। ट्रेन के लिए पुराने कोच ही मुहैया कराए जाएंगे। अतिरिक्त मांग पर लिंकहाफमैन बुश (एलएचबी) दिए जाएंगे।
गोरखपुर से एलटीटी तक 20 कोच चलाने का खर्च 3.32 करोड़
गोरखपुर से एलटीटी तक अगर 20 कोच की रेक लगाकर ट्रेन चलाई जाती है तो कुल 3.32 करोड़ खर्च आएगा। इसमें रेक सिक्योरिटी डिपॉजिट में एक करोड़ रुपये (दो वर्ष के लिए), राइट टू यूज में कोच खर्च 3761004 रुपये (एसी 3, एसी 2 के छह-छह कोच व एसएलआर दो व एक पैंट्रीकार), स्टेबलिंग चार्ज पहले 100 दिन के लिए एक लाख रुपये तथा अगले 50 दिन के लिए 425000 रुपये, फिक्स हैंडिल चार्ज में 25294606 रुपये तथा वैरिबल हैंडल चार्ज में 3703160 रुपये देने होंगे।
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने कहा कि थीम आधारित भारत गौरव ट्रेन के संचालन, पंजीकरण एवं रेक आवंटन के लिए 'BHARAT GAURAV TRAINS' के नाम से पोर्टल जारी किया गया है। जनभागीदारी बढ़ाने के क्रम में इस योजना को आरंभ किया गया है। कोई भी इच्छुक व्यक्ति अथवा संस्था इसका लाभ उठा सकती है। पूर्वोत्तर रेलवे की बीडीयू टीम इस योजना को सफल बनाने के लिए सभी संबंधित लोगों के साथ संवाद स्थापित कर रही है।