स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह व अन्य। (फाइल)
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प्रयागराज माघ मेला बहुत पुरानी परंपरा है। इस बार माघ मेला कोविड प्रोटोकाल के अनुसार करवाया जाएगा। श्रद्धालुओं, कल्पवासियों और साधु-संतों को मेले में प्रवेश के लिए 48 घंटे के अंदर की निगेटिव आरटीपीसीआर की रिपोर्ट लानी होगी। यही व्यवस्था गोरखनाथ खिचड़ी मेले में भी लागू होगी। मेले में मास्क अनिवार्य होगा। यह बातें स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने कहीं।
वह इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शहर में शामिल होने आए थे। कहा कि इस वक्त पौने दो लाख के आसपास कोरोना जांच कराई जा रही है। करीब पांच से छह लाख जांच की क्षमता है। आने वाले दिनों में जांच का दायरा बढ़ाकर तीन से सवा तीन लाख किया जाएगा।
कोरोना के 10 प्रतिशत केस में जीनोम सीक्वेसिंग की जांच कराई जा रही है। इसे और बढ़ाया जाएगा। नोएडा और गोरखपुर में जीनोम सीक्वेसिंग के लिए मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। गोरखपुर को फरवरी माह में मशीनें भी मिल जाएंगी।
इसके बाद से पूर्वांचल में जीनोम सीक्वेसिंग के लिए बड़ा केंद्र गोरखपुर बन जाएगा। बताया कि कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन का लक्षण भी पुराने वैरिएंट की तरह ही हैं। लेकिन, ओमिक्रॉन की संक्रमण दर काफी तेज है। राहत की बात यह है कि लोग होम आइसोलेशन में हैं। बताया कि कोविड से पहली मौत की सूचना मेरठ के डॉक्टर की मिली है। इसकी पूरी जानकारी इकट्ठा कराई जा रही है।
केस बढ़ने पर प्रशासन तय करेगा कर्फ्यू का फैसला
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अगर जिलों में केस बढ़ते हैं तो कर्फ्यू, कंटेनमेंट जोन, लॉकडाउन का फैसला प्रशासन तय करेगा। इसके लिए शासन ने प्रदेश स्तर पर नोडल अधिकारी भी बना दिए हैं। नोडल अधिकारी अधिक केस वाले जिलों की समीक्षा भी करेंगे।
स्कूलों में किशोरों को लगवाया जा रही टीका
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 15 से 18 वर्ष के एक करोड़ 47 लाख किशोरों को कोरोना का टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसकी शुरुआत भी जीन जनवरी से हो चुकी है। मौजूदा समय में स्कूल बंद कर दिए गए हैं। लेकिन, किशोरों को टीका लगवाने के लिए उनके स्कूलों में सेंटर बनाकर उन्हें बुलाया जा रहा है, जिससे की जल्द से जल्द सभी किशोरों को टीका लग सके। इसके अलावा फ्रंटलाइन वर्कर, हेल्थ वर्कर, चुनाव में ड्यूटी करने वाले कर्मी और 60 साल के बीमार बुजुर्गों को प्राथमिकता के आधार पर बूस्टर डोज 10 जनवरी से लगाया जाएगा।
551 ऑक्सीजन प्लांट हो चुके हैं स्थापित
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि पहली और दूसरी लहर से अनुभव लेते हुए प्रदेश भर में 551 ऑक्सीजन प्लांट स्थापित कराए जा चुके हैं। यह प्लांट पीएम केयर फंड, सीएसआर समेत जनप्रतिनिधियों के फंड से लगाए गए हैं। इसके अलावा एक लाख 80 हजार बेड, 56 हजार ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर विभाग के पास मौजूद हैं। तीन बार डॉक्टरों की टीम मॉकड्रिल भी कर चुकी है। ऑक्सीजन प्लांट भी चेक किए जा चुके हैं। कही कोई कमी नहीं मिली है।
डेटाबेस किया जाएगा तैयार
मेले में आने वाले कल्पवासियों का डेटाबेस भी तैयार किया जाएगा। 15-15 दिनों में दो बार रैपिड एंटीजेन किट से हर कल्पवासी की कोविड जांच भी कराई जाएगी। इसके अलावा शिविर में अगर एक भी श्रद्धालुओं की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो सभी लोगों को 15 दिन के लिए आइसोलेट भी किया जाएगा।