मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पूर्वोत्तर रेलवे पंकज कुमार सिंह ने बताया कि पैसेंजर और डेमू ट्रेनों को चलाने के प्रस्ताव को रेलवे बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। ट्रेनों को कब से संचालित किया जाएगा, इसे लेकर अधिकारी विमर्श कर रहे हैं। जल्द ही तारीख फाइनल हो जाएगी।
पैसेंजर ट्रेन व डेमू के चलने से मजदूर, नौकरीपेशा वालों के साथ ही छात्रों को ज्यादा सुविधा होगी। गोरखपुर और आसपास के जिलों में यही वर्ग सबसे ज्यादा पैसेंजर और डेमू पर निर्भर थे। इन्हें रोजाना अप-डाउन करना पड़ता है। बस या छोटे साधन की अपेक्षा ट्रेन से सफर ज्यादा सस्ता पड़ता है।
लॉकडाउन के बाद से ही इनका सफर कई गुना महंगा हो गया है। मसलन, गोरखपुर से खलीलाबाद की यात्रा अगर डेमू या पैसेंजर ट्रेन से करते हैं तो 10 से 15 रुपये लगते हैं, जबकि बस से सफर करने में 30 से 40 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। जाम में फंसने पर समय अतिरिक्त लग जाता है।
गोरखपुर से आठ पैसेंजर ट्रेनें व डेमू को चलाने की तैयारी है। पैसेंजर में आठ से दस रेक व डेमू में छह से आठ कोच वाले रेक लगते हैं। दो तरह के कोच इस समय हैं। पुराने मॉडल के कोच में 90 सीटें और नए कोच में 100 सीटों की व्यवस्था है। इस हिसाब से करीब आठ ट्रेनों में आठ हजार यात्री सफर करेंगे। कोरोना की गाइडलाइन के चलते जितनी सीट है उतने ही यात्री सवार होंगे।
मंडलवार ट्रेनों की संख्या
- लखनऊ मंडल : 07
- वाराणसी मंडल : 13
- इज्जतनगर मंडल : 12
गोरखपुर से चलने वाली ट्रेनें
- गोरखपुर-गोंडा-सीतापुर पैसेंजर
- गोरखपुर-बढ़नी-गोंडा डेमू
- गोरखपुर-नौतनवां डेमू
- गोरखपुर-बाराबंकी डेमू
- गोरखपुर-सीवान वाया कप्तानगंज डेमू
- सीवान-गोरखपुर पैसेंजर
- गोरखपुर-सीवान-छपरा पैसेंजर
- गोरखपुर-नरकटियागंज पैसेंजर
हाल्ट अभिकर्ताओं को मिलेगी संजीवनी
पूर्वोत्तर रेलवे में जनरल टिकट बेचने वाले करीब 250 हाल्ट अभिकर्ता (टिकट विक्रेता) की मुश्किलें खत्म होने वाली हैं। पैसेंजर ट्रेन और डेमू का टिकट बेचने पर इन्हें कमीशन मिलता है। जिससे उनकी आजीविका चलती है। ट्रेनों के न चलने से करीब एक साल से ये अभिकर्ता बेरोजगार हो गए थे।