पेयजल की पाइपलाइन एक निजी कंपनी बिछाएगी, यह सूचना किसी के लिए सुखद हो सकती है, मगर जलनिगमकर्मियों के लिए यह आसन्न आपदा की खबर से कम नहीं है। जल निगम, पानी की पाइपलाइन बिछाने व ओवरहेड टैंक बनाने के एक काम से फिर महरूम हो गया। क्या यह पांच महीने से वेतन-पेंशन के लिए परेशान निगमकर्मियों के भविष्य की राह और अंधेरी होने की आहट नहीं ?
गोरखपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में पाइपलाइन के जरिये घर-घर पेयजल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दक्षिण भारत की कंपनी नागार्जुन कंस्ट्रक्शन को मिली है। केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन योजना के तहत कंपनी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। योजना के क्रियान्वयन के लिए जल निगम की बजाय लघु सिंचाई विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
गोरखपुर जिले में करीब 1354 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से 300 से ज्यादा ग्राम पंचायतों में पेयजल की आपूर्ति की व्यवस्था की जा चुकी है। तकरीबन 1000 और ग्राम पंचायतों में घर-घर पेयजल की आपूर्ति होनी है। जल निगम ने इस संबंध में सर्वे पूरा कर लिया था, लेकिन अब सरकार ने जल जीवन मिशन योजना के तहत घर-घर पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी दक्षिण भारत की कंपनी नागार्जुन कंस्ट्रक्शन को दे दी है।
जल निगम : छिन रहा है काम, वेतन-पेंशन का संकट
जल निगम अधिशासी अभियंता सिकंदर अली ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में पेयजल पाइपलाइन बिछाने और ओवरहेड टैंक बनाने की जिम्मेदारी नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी को दी गई है। सरकार की ओर से नोडल एजेंसी के रूप में लघु सिंचाई विभाग को नामित किया गया है।
गोरखपुर जल निगम से पानी की पाइपलाइन बिछाने और ओवरहेड टैंक बनाने का काम लगातार छिन रहा है। यह काम अब दूसरे विभागों को सौंपने से निगम के कर्मचारियों, अधिकारियों के वेतन और सेवानिवृत्तकर्मियों के पेंशन का संकट पैदा हो गया है।
दरअसल, जल निगमकर्मियों को प्रोजेक्ट राशि के 12.5 प्रतिशत सेंटेज (सुपरविजन चार्ज) से ही वेतन और पेंशन मिलता है। जब जल निगम को कोई काम मिलेगा, तभी उन्हें सेंटेज मिलेगा। अब जबकि, धीरे-धीरे निगम का काम दूसरे विभागों को सौंपा जाने लगा है, तो सेंटेज नहीं बन पाने से वेतन और पेंशन का संकट पैदा हो गया है। स्थिति यह है कि जल निगमकर्मियों को पिछले पांच महीने से वेतन नहीं मिल रहा है। सेवानिवृत्त कर्मी पेंशन से वंचित हैं।
जल निगम अवर अभियंता अमित सिंह ने बताया कि पानी की पाइपलाइन बिछाने और ओवरहेड टैंक बनाने के विशेषज्ञ इंजीनियर जल निगम में हैं। ऐसे में दूसरे विभागों को यह जिम्मेदारी देने से काम भी प्रभावित होगा। वहीं दूसरी तरफ जल निगम के पास ग्रामीण इलाकों में पाइपलाइन बिछाने और ओवरहेड टैंक बनवाने का जो काम है, वह दिसंबर 2021 में खत्म हो जाएगा। उसके बाद जल निगम के पास कोई काम नहीं रह जाएगा, जिससे वेतन और पेंशन मिलना भी मुश्किल हो जाएगा। पिछले पांच महीने से बिना वेतन के काम कर रहे हैं। सरकार को इस विषय में सोचना चाहिए।
रामगढ़ताल सहायक परियोजना अधिकारी सुजीत चौरसिया ने बताया कि रामगढ़ताल परियोजना से जुड़े हुए हैं। रविवार या अन्य कोई छुट्टी का पता ही नहीं चलता। सारी छुट्टियों को भूलकर पूरी तन्मयता से अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। पिछले पांच महीने से वेतन नहीं मिल रहा है। बैंक अकाउंट का पैसा भी खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। गृहस्थी चलाना मुश्किल हो गया है। सरकार हमें काम दे। पूरी मेहनत से काम करेंगे। वेतन उपलब्ध कराने के बारे में भी सरकार को कुछ सोचना चाहिए।