फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में जिस रवि आर्म्स की दुकान को प्रशासन ने सील किया उसमें गोरखपुर एवं अन्य जिलों के 200 से अधिक लोगों ने अपने असलहे जमा किए थे। दो साल से अधिक समय से इनके असलहे दुकान में ही बंद हैं। अब तो कई लाइसेंसधारी अपने असलहों की सूरत तक भूलने लगे हैं। कई के नवीनीकरण की तिथि खत्म हो गई है। मगर दो साल से दौड़ लगाने के बाद भी इन्हें असलहे नहीं मिल पा रहे हैं।
पिछले वर्ष मार्च के बाद से ही पूर्व डीएम के. विजयेंद्र पांडियन की तरफ से इन असलहों का सत्यापन कर उन्हें संबंधित लाइसेंसधारियों को सौंपने के लिए तीन-चार बार कमेटी बनाई गई। मगर कानूनी उलझनों के डर से कोई भी कमेटी सील खुलवाकर इन असलहों को उनके मालिकों को नहीं दे सकी।
लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान शासन-प्रशासन की सख्ती पर गोरखपुर एवं आसपास के जिलों के करीब 250 लाइसेंसधारियों ने अपने असलहे टाउनहाल स्थित रवि आर्म्स नामक दुकान पर जमा किए थे। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक करीब 20-25 लोगों ने तो अपने लाइसेंस भी वहां जमा कर रखे हैं। इसी बीच 16 अगस्त 2019 को फर्जी शस्त्र लाइसेंस का मामला प्रकाश में आते ही जिला प्रशासन ने इस दुकान को सील कर दिया। इसके बाद से ही लाइसेंसधारी अपने असलहे छुड़ाने के लिए दौड़ लगा रहे हैं मगर उनके हाथ निराशा ही लग रही है। इनमें से कई के तो नवीनीकरण की तारीख भी बीत गई है। वहीं असलहों को रिलीज कराने के लिए प्रशासन की तरफ से की जा रही लेट लतीफी से निराश कुछ लाइसेंसधारी कोर्ट तक जाने की तैयारी में हैं।
मार्च 2021 में खुली थी आखिरी सील
रवि आर्म्स दुकान में शस्त्र के साथ ही लिनोलियम का भी कारोबार होता था। जिला प्रशासन की तरफ से शस्त्र की दुकान सील किए जाने के बाद प्रोपराइटर की पत्नी की तरफ से कोर्ट में एक याचिका दायर कर लिनोलियम की दुकान खोलने की अपील की गई थी। कोर्ट ने जिला प्रशासन को मामले का निस्तारण करने का निर्देश दिया था, जिसपर मार्च 2021 में मौके पर पहुंची मजिस्ट्रेट व पुलिस की टीम ने जब दुकान का सत्यापन किया तो पता चला कि शस्त्र और लिनोलियम, दोनों कारोबार जिस दुकान में होता है उसमें आने-जाने का रास्ता एक ही है जिसे प्रशासन ने फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में सील किया था। इसके बाद प्रोपराइटर की पत्नी को राहत नहीं मिली।
एसीएम के नेतृत्व में बनाई गई है कमेटी
पूर्व डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने आखिरी बार एसीएम पंकज दीक्षित के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई थी जो रवि आर्म्स में रखे सभी असलहों का सत्यापन करने के बाद उसे निकालकर संबंधित लाइसेंसधारियों को सुपुर्द करती। जो लाइसेंसधारी नहीं पहुंचते उनके असलहे दूसरे शस्त्र दुकानों में रखने के निर्देश दिए गए थे ताकि वे जब भी आते तो उनका असलहा उन्हें मिल जाता। कमेटी अभी दुकान की सील खोलकर असलहे बाहर निकालने की तैयारी करती कि कोरोना की दूसरी लहर शुरू हो गई और पीड़ित लाइसेंसधारियों का इंतजार और बढ़ गया।
गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज के हैं असलहाधारी
गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज के हैं असलहाधारी
रवि आर्म्स में जिन लोगों के असलहे जमा हैं वे मूल रूप से गोरखपुर के रहने वाले हैं। इनमें से कुछ वर्तमान में देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज में रह रहे हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक दुकान खुलने और असलहों का सत्यापन होने पर ही यह ठीक-ठीक पता चल सकेगा ऐसे कितने लोग हैं जो वर्तमान में दूसरे जिलों में नौकरी या व्यापार के सिलसिले में बस चुके हैं।
एसीएम पंकज दीक्षित ने बताया कि जल्द ही दुकान का सील तोड़कर वहां जमा कराए गए असलहों का सत्यापन कराया जाएगा। जिनके आवेदन आए हैं उन्हें जरूरी प्रक्रिया पूरी कर असलहा सौंप दिया जाएगा। साथ ही बचे हुए असलहों को नजदीक के किसी शस्त्र विक्रेता की दुकान पर रखा जाएगा। वहां से संबंधित व्यक्ति आकर अपने असलहे ले जा सकेंगे।
डीएम विजय किरण आनंद ने बताया कि सील दुकान में लाइसेंस धारकों के असलहे रखे होने की जानकारी नहीं है। इस मामले का परीक्षण कराया जाएगा। उसके बाद नियमानुसार लोगों को राहत प्रदान की जाएगी।