मोक्षदा एकादशी मंगलवार को मनाई जाएगी। श्रद्धालु व्रत रखकर विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करेंगे। शास्त्रों में इसे मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी बताया गया है। मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध के दौरान गीता का उपदेश दिया था, इसलिए इस दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है।
हृषिकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन एकादशी तिथि दिनभर व रात एक बजकर 30 मिनट तक रहेगी। पूरे दिन अश्वनी नक्षत्र रहेगा। इस दिन अमृत नामक महा औदायिक योग भी है, जो लोगों को दीर्घायु प्रदान करेगा।
एकादशी व्रत धार्मिक महत्व
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, धार्मिक मान्यता है कि एकादशी के दिन व्रत करने वालों के पितर अपने परिवारवालों को आशीर्वाद देते हैं। इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति रहती है। इस व्रत को करने से धन-धान्य और पुत्रादि की वृद्धि होती है। कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन आनंद से परिपूर्ण हो जाता है। एकादशी व्रत करने से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
एकादशी व्रत की पूजन विधि
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें। विष्णुजी को गंगाजल से स्नान कराएं। फिर उन्हें रोली, चंदन, अक्षत आदि अर्पित करें। विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। इसके बाद पहले भगवान गणेश की आरती करें, फिर विष्णुजी की आरती कर लक्ष्मीजी की भी आरती करें। एकादशी के अगले दिन द्वादशी को पूजन के बाद जरूरतमंदों को भोजन व दान-दक्षिणा दें। इसके बाद व्रत का पारण करें।