तालाब में ऑक्सीजन की कमी न होने पाए, इसके लिए मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में इंटरनेट ऑफ थिंक (टीओपी) सेंसर प्रोजेक्ट को नाबार्ड ने मंजूरी दे दी है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) जल्द ही एमएमएमयूटी को 21 लाख रुपये देगा। यह प्रोजेक्ट देवरिया के पांच गांवों में शुरू होगा।
इस प्रोजेक्ट के तहत तालाब में ऑक्सीजन की कमी से मछलियां नहीं मरेंगी। ऑक्सीजन की कमी होते ही, इंटरनेट ऑफ थिंक (टीओपी) सेंसर सक्रिय हो जाएगा। संदेश मिलते ही तालाब में लगाए गए स्प्रिंकलर से कृत्रिम बारिश होने लगेगी। जो तालाब में ऑक्सीजन की मात्रा सामान्य होने तक जारी रहेगी।
दरअसल, गर्मी बढ़ते ही तालाबों में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। जिसके चलते मछलियां मरने लगतीं हैं। मछली पालकों को इसकी जानकारी तब होती है, जब मछलियां मरकर ऊपर तैरने लगती हैं। प्रोजेक्ट की मानीटरिंग एमएमएमयूटी के शोधार्थी और शिक्षक करेंगे।
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