ऐसे करें पूजन
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत का संकल्प लेकर संगम या पवित्र नदी में स्नान करें। भगवान विष्णु की प्रतिमा का पीले फूल, केसर, चंदन, घी के दीपक और प्रसाद के साथ पूजन करें। भगवान का ध्यान करने के बाद विष्णु चालीसा या विष्णु सहस्त्र नाम का जप करें। भगवान विष्णु के भक्तों एवं ब्राह्मणों को दान अवश्य करें। गुड़, तिल के लड्डू, कंबल, चावल, खिचड़ी, सतंजा, गाय, ऊनी वस्त्र आदि के दान का विशेष महत्व है। मंदिर या नदी तट पर दीपदान करना न भूलें। सायंकाल भी धूप से आरती करें। पीले मीठे पकवान का भोग लगाएं। गौ को खिलाने के बाद व्रत का पारण करें।
पितृकर्म और देवकर्म का है दिन
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, धर्मशास्त्र में अमावस्या को पितृकर्म और देवकर्म दोनों के लिए प्रशस्त दिन माना गया है। इस महीने में सूर्य मकर राशिगत होने से (उत्तरायण का प्रारंभिक होने के कारण) देवगणों के लिए यह अत्यंत हर्ष का समय रहता है, इसलिए देवी-देवता और सभी तीर्थों के अधिपति पृथ्वी पर आ जाते हैं। ये नदियों के संगम पर स्नान करते हैं। अत: संगम पर स्नान से इनका सानिध्य और आशीर्वाद प्राप्त होता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, इस दिन प्रयाग या नदियों के संगम पर अथवा पवित्र नदी में स्नान करने से व्यक्ति की सात पीढ़ियां पवित्र हो जाती हैं।