ग्राम पंचायत सदस्य चाहें तो वे ग्राम पंचायत के प्रस्ताव से असहमति जता सकते हैं। इससे प्रस्ताव पारित होने में दिक्कत आ सकती है। नियमत: प्रस्ताव पारित न होने पर कोई भी विकास कार्य नहीं हो सकता है। मगर वास्तविकता थोड़ी अलग है। सारी प्रक्रिया कागज पर ही पूरी कर ली जाती है।
पंचायत सदस्य भी जानते हैं कि प्रस्ताव पर उनकी असहमति का कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है, इसलिए वे भी विरोध नहीं करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि कोई भी ग्राम पंचायत सदस्य, प्रधान के प्रस्ताव का विरोध करने का प्रयास नहीं करता, क्योंकि ज्यादातर सदस्य प्रधान के करीबी होते हैं।
डीपीआरओ ने किया था आगाह
नामांकन पत्रों की बिक्री के समय ही डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने सभी एडीओ पंचायत को गांवों के लोगों को आरक्षण की जानकारी देने के निर्देश दिए थे। उनको ग्राम पंचायत सदस्य पद की अहमियत बताते हुए प्रचार-प्रसार कराने को कहा था कि यदि जरूरी सदस्यों की संख्या पूरी नहीं होगी तो संबंधित पंचायत का गठन नहीं हो पाएगा, जिससे गांव का विकास कार्य प्रभावित होगा।
डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने कहा कि दो तिहाई ग्राम पंचायत सदस्य न होने पर संबंधित ग्राम पंचायत का गठन नहीं हो पाएगा। ऐसी पंचायतों में प्रधान पद पर जीत दर्ज करने वाले प्रत्याशी शपथ नहीं ले सकते। इन पंचायतों में ग्राम पंचायत सदस्य के लिए छह महीने के भीतर उपचुनाव कराए जाएंगे। ऐसी कितनी पंचायतें हैं, इनका आकलन किया जा रहा है। दो से तीन दिन में संबंधित पंचायत की जानकारी हो जाएगी।