कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की हत्या में नामजद जेएन सिंह एंड कंपनी अपने ही बुने जाल में फंसती चली गई। खुद को बचाने के लिए आरोपी पुलिस कर्मियों ने जो भी झूठ बोला, उसका पर्दाफाश हो गया है। कानपुर से आई स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने सारे झूठ पकड़ लिए हैं और साक्ष्य भी जुटा लिए हैं।
कारोबारी मनीष गुप्ता की मौत के मामले में इंस्पेक्टर जेएन सिंह, दरोगा अक्षय मिश्रा, राहुल दुबे और विजय यादव के साथ ही हेड कांस्टेबल कमलेश यादव व कांस्टेबल प्रशांत कुमार के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज है। सभी निलंबित भी हैं। मामले की जांच एसआईटी कर रही है। अब तक की जांच में जो साक्ष्य सामने आए हैं, उसके मुताबिक जेएन सिंह एंड कंपनी की मुश्किल बढ़नी तय है। जेएन सिंह एंड कंपनी ने हर कदम पर झूठ बोला। जिसका पर्दाफाश सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक जांच से हो चुका है। होटल कर्मियों ने भी जेएन सिंह एंड कंपनी की बर्बरता बता दी है।
गवाहों ने बयान दर्ज कराया है कि आरोपी पुलिस कर्मियों ने होटल के कमरे में कारोबारी व उसके दोस्तों की पिटाई की थी। अब एसआईटी हर झूठ पर गिरफ्तार जेएन सिंह व अक्षय मिश्रा से जवाब मांग रही है। सूत्रों का कहना है कि साक्ष्यों के साथ थाने में बैठी एसआईटी के सवालों का जवाब जेएन सिंह व अक्षय मिश्रा नहीं दे पा रहे हैं।
जाल-1
मनीष गुप्ता अपने दोस्तों के साथ होटल कृष्णा पैलेस के कमरा नंबर 512 में ठहरे थे। रामगढ़ताल पुलिस सीधे उसी कमरे में गई। आरोप है कि मनीष सहित अन्य दोस्तों की पिटाई की गई। इसमें मनीष की मौत हो गई। घटना के बाद इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह व दरोगा अक्षय मिश्रा सहित अन्य पुलिस कर्मियों ने इसे हादसे का रूप देना चाहा था। होटल के कर्मचारी से पत्र लिखवाकर पेशबंदी की थी। पत्र में लिखवाया था कि गिरने से मनीष की मौत हुई थी। इस पत्र को एसआईटी ने जब्त किया है। एसआईटी की जांच में यह भी साबित हुआ कि यह महज हादसा नहीं था।
जाल-2
घटना के बाद निलंबित इंस्पेक्टर ने रामगढ़ताल थाने की जीडी में लिखा था कि होटल में घायल मनीष गुप्ता को जिला अस्पताल ले जाया गया था, जो गलत साबित हुआ है। मनीष को सबसे पहले मानसी अस्पताल ले जाया गया था, फिर बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था। इंस्पेक्टर का यह झूठ भी एसआईटी ने पकड़ लिया है। सीसीटीवी फुटेज से साफ हो गया कि मनीष को जिला अस्पताल नहीं ले जाया गया था। मानसी अस्पताल में ही मनीष की पल्स नहीं चल रही थी। यह बात डॉक्टर ने इंस्पेक्टर जगत नारायण व दरोगा अक्षय मिश्रा को बताई भी थी।
जाल-3
होटल में घायल मनीष को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाने के लिए दो पर्चा कटवाया गया। पहले पर्चे में मनीष को अज्ञात बताकर मृत घोषित किया गया था। पांच मिनट बाद ही भर्ती करवाने का दूसरा पर्चा कटवाया गया। इसमें मनीष का नाम लिखा गया। यह भी लिखा गया कि मनीष की सांसें चल रहीं थीं। सर्जरी वार्ड में भी भेजा गया, लेकिन कुछ देर बाद ही मृत घोषित कर दिया गया। एसआईटी ने दोनों पर्चों को जब्त कर लिया है।
जाल-4
इंस्पेक्टर ने जीडी में लिखा था कि घटना के बाद दरोगा राहुल दुबे व विजय यादव को बुलाया गया था, लेकिन ऐसा नहीं था। होटल के अंदर व बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे से साफ हो गया कि घटना के वक्त इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह, दरोगा अक्षय मिश्रा, दरोगा राहुल दुबे व विजय यादव, हेड कांस्टेबल कमलेश यादव व कांस्टेबल प्रशांत कुमार मौजूद थे। कानपुर से आई एसआईटी ने सीसीटीवी कैमरे की डीवीआर जब्त की है।
जाल-5
घटना के बाद जेएन सिंह एंड कंपनी ने कमरा नंबर 512 और रामगढ़ताल थाने के बोलेरो की सफाई करा दी थी। उन्हें लगा था कि साक्ष्य मिट जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एसआईटी ने छानबीन की तो खून से सना तौलिया बरामद हुआ। फोरेंसिक एक्सपर्ट की मदद से होटल के कमरे, बरामदे, लिफ्ट व सीढ़ी के आसपास खून के धब्बे भी मिल गए। इंस्पेक्टर जिस बोलेरो से चलते थे, उसपर भी खून के धब्बे मिल गए थे।