मनीष हत्याकांड में जांच करती एसआईटी कानपुर।
- फोटो : अमर उजाला।
मनीष गुप्ता की मौत मामले में जांच करने कानपुर से आई एसआईटी के सामने होटल कृष्णा पैलेस के कर्मचारी आदर्श पांडेय ने कई राज खोले हैं। आदर्श ने एसआईटी टीम को बता दिया है कि किसके कहने पर मनीष के कमरे की सफाई की गई थी। मगर टीम इस पर कुछ बोलने को तैयार नहीं है। बताया जा रहा है कि पुलिस वालों ने ही इसे हादसा बताकर सफाई करने को कहा था, मगर किसने? यह राज एसआईटी टीम के पास कैद है। होटल से एसआईटी को कई अन्य सुराग भी मिले हैं।
जानकारी के मुताबिक, मनीष गुप्ता की मौत के बाद ही होटल के उस कमरे की सफाई कर दी गई थी, जिसमें मनीष और उनके दोस्त रुके थे। आरोप है कि कमरे से साक्ष्य मिटाने की कोशिश की गई थी। मनीष की पत्नी मीनाक्षी ने उसी शाम होटल पहुंचकर इस बारे में सवाल उठाया था। इसके बाद ही कमरे को सील किया गया था। हालांकि एसआईटी कानपुर की फोरेंसिक टीम ने बेंजाडीन टेस्ट के जरिए जमीन की सतह के मिटाए गए सुबूत जुटाए हैं।
होटल में एक नहीं बल्कि कई जगहों से मिटाए गए खून के धब्बें मिले हैं। जिस कमरे में कारोबारी मनीष ठहरे थे, उसमें कई जगह खून के धब्बे मिले हैं। बरामदे, लिफ्ट, लिफ्ट के बाहर, सीढ़ियों और निकास द्वार के पास भी खून के धब्बे मिले हैं। फोरेंसिक टीम की मदद से सैंपल लिए गए हैं। वहीं, गोरखपुर फोरेंसिक टीम को मिला खून से सना तौलिया भी कानपुर फोरेंसिक टीम को सौंप दिया गया है।
हरवीर और प्रदीप का बयान दर्ज करेगी एसआईटी
कारोबारी मनीष के दोस्त हरवीर और प्रदीप।
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मनीष गुप्ता की मौत के मामले में गुरुग्राम के दो दोस्तों का बयान भी दर्ज होगा। इनको बुधवार को कानपुर बुलाया गया है। पुलिस कमिश्नर असीम अरुण के सामने ही बयान दर्ज होंगे। इस घटना में दोस्तों के बयान अहम होंगे, क्योंकि घटना के वक्त दोनों प्रत्यक्षदर्शी के तौर पर मनीष के रूम में मौजूद थे। एसआईटी दोनों को गवाह भी बनाएगी। घटना के बाद दोस्तों का आरोप था कि मनीष की मौत पुलिस की पिटाई से हुई थी।
कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता गत 27 सितंबर को गुरुग्राम के अपने दो दोस्तों हरवीर सिंह और प्रदीप कुमार के साथ गोरखपुर घूमने आए थे। होटल कृष्णा पैलेस में ठहरे थे। देर रात रामगढ़ताल पुलिस जांच के नाम पर कमरे में पहुंची और दस्तावेजों की जांच की थी। हरवीर और प्रदीप कुमार का आरोप था कि पुलिस की नीयत ठीक नहीं थी। लिहाजा, मारपीट की गई और इसी में मनीष गुप्ता की जान चली गई। घटना के बाद पुलिस कर्मी घबराए और अपनी बोलेरो जीप से मनीष को अस्पताल ले गए।
अब मामले की जांच कर रही एसआईटी ने दोनों को पूछताछ के लिए कानपुर बुलाया है। इसकी पुष्टि गुरुग्राम के प्रदीप कुमार ने की है। अमर उजाला संवाददाता से मोबाइल फोन पर प्रदीप ने कहा कि कानपुर के पुलिस कमिश्नर ने सुरक्षा का भरोसा दिलाया है। बुधवार को गोरखपुर की रामगढ़ताल पुलिस की करतूत बताने जाएंगे। जो सच है, वही बताएंगे। रामगढ़ताल के तत्कालीन इंस्पेेक्टर जयनारायण सिंह और दरोगा अक्षय मिश्रा की मौजूदगी में ही सब कुछ हुआ है। घटना होटल के सीसीटीवी फुटेज में कैद है।
गोरखपुर पुलिस को बयान देने से इनकार
घटना के प्रत्यक्षदर्शी प्रदीप कुमार के मुताबिक गोरखपुर पुलिस ने भी बयान दर्ज करने के लिए बुलाया था, लेकिन साफ मना कर दिया है। कह दिया है कि गोरखपुर पुलिस पर भरोसा नहीं है। एसआईटी के समक्ष बयान दर्ज कराएंगे। घटना के बाद और उसके अगले दिन गोरखपुर पुलिस का रवैया ठीक नहीं था। ऐसा लग रहा था कि पुलिस हमें बदमाश साबित करने पर आमादा थी। तीनों दोस्तों (मनीष, हरवीर और प्रदीप) ने अपना फोटो युक्त पहचान पत्र होटल में जमा किया था। इसके बावजूद पुलिस की तरफ से कहा जा रहा है कि मनीष के पास पहचान पत्र नहीं था। वह भागते समय गिर पड़ा था। यह सफेद झूठ है।