आरोपी शमीम कोर्ट से जमानत पाने के बाद फरार हो गया था और तभी से फरार था। फरार होने के दौरान वह चेन्नई में छिपा था, करीब छह महीने पहले वह गोरखपुर लौट आया। एसपी सिटी ने पुराने एनबीडब्लू की समीक्षा की तो इस दौरान आरोपी के फरार होने की जानकारी हुई और फिर पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
उस समय पुलिस ने पीएसी लगवाकर कई बार योगी के ठिकानों पर दबिश देना शुरू कर दिया था। यही नहीं योगी के समर्थकों को बड़ी संख्या में जेल भेजा गया था। योगी समर्थक पुलिस के डर से अपना गांव छोड़कर पलायन कर गए थे। तब योगी ने अपनी पीड़ा लोकसभा में रखी थी। पुलिसिया आतंक और प्रताड़ना का वर्णन करने के दौरान योगी सदन में फूट-फूट कर रो पड़े थे।
जानकारी के लिए बता दें कि 25 जनवरी 2007 को गोरखपुर में मोहर्रम के जुलूस में छेड़खानी की बात पर दो गुटों में विवाद छिड़ गया था। विवाद इतना बढ़ गया था कि युवक पर चाकू से हमला कर दिया था। जिसकी मौत हो गई थी। इसी मामले में आरोपी शमीम को गिरफ्तार किया था। दूसरे गुट के एक शख्स राजकुमार अग्रहरी की हत्या कर दी गई। जिसके बाद गोरखपुर में दंगे शुरू हो गए।