करीब सौ साल पहले आठ फरवरी 1921 को महात्मा गांधी गोरखपुर आए थे। उन्होंने बाले मियां के मैदान पर जनसभा की थी। उन्हें सुनने के लिए एक तरह से जन सैलाब उमड़ पड़ा था। बताया जाता है कि करीब डेढ़ लाख लोग इस जनसभा में शामिल हुए थे।
सुबह-सुबह गोरखपुर रेलवे स्टेशन ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज रहा था। घुटनों तक धोती पहने दुबला-पतला एक व्यक्ति समर्थकों के साथ स्टेशन से बाहर निकला और ऊंचे स्थान पर खड़ा होकर जनता का अभिवादन स्वीकार किया। सामने एक चादर बिछी थी, उस पर पैसों की बारिश हो रही थी।
यह व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि महात्मा गांधी थे। यह उनका गोरखपुर में पहला और आखिरी आगमन था। उसी दिन उन्होंने बाले मियां मैदान पर जनता को संबोधित किया। वह दौर खिलाफत आंदोलन का था। लिहाजा सभा में उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देने के अलावा अवध के किसानों को हिंसक आंदोलन नहीं करने की सलाह दी।