बृहस्पतिवार की देर रात भी वह प्रयागराज जा रहा था। इस बीच उसकी लोकेशन एसटीएफ को मिल गई। एसटीएफ ने उसे सुल्तानगंज के पास घेरा तो विनोद और उसके साथियों ने फायरिंग शुरू कर दी। इसमें विनोद मारा गया। सूत्रों का दावा है कि फरारी के दौरान गोरखपुर के गोरखनाथ थाने का एक हिस्ट्रीशीटर माफिया विनोद को पनाह दिए हुए था। क्योंकि, हिस्ट्रीशीटर और माफिया विनोद दोनों सूद का धंधा मिलकर करते थे।
विनोद अक्सर हिस्ट्रीशीटर के लखनऊ, दिल्ली और मुंबई सहित अन्य ठिकानों पर ही पनाह लेता था। दोनों अंदरखाने एक बार फिर किसी अन्य पार्टी के जरिए राजनीति में इंट्री लेने की तैयारी कर रहे थे।
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