त्रेता युग से आस्था का केंद्र बिंदु मनोरमा नदी राम जन्म के निमित्त किए गए पुत्र कामेष्ठी यज्ञ में सहभागिता कर भगवान श्री राम के जन्म एवं मर्यादा काल की साक्षी बनी। तब से अब तक आस्थावानों के लिए पुत्र कामना के साथ-साथ धर्म एवं अर्थ की कामना की पूर्ति के लिए भी मनोरमा पवित्र एवं निर्मल है।
देश विदेश से तमाम लोग पुण्य तिथियों पर यहां आकर स्नान ध्यान तथा यज्ञ आयोजन कर अपनी मनौती मानते हैं। रुद्रायमल में वर्णित कथा के अनुसार बस्ती वन प्रदेश में बहने वाली मनोरमा गंगा का अवतरण त्रेता काल में हुआ।
ऋषि श्रेष्ठ श्रृंगी द्वारा सरयू तीर्थ क्षेत्र से उत्तर दिशा में स्थित मख भूमि में कराए जा रहे दशरथ के पुत्र का कामना यज्ञ में जब पवित्र जल की आवश्यकता पड़ी तो यज्ञ क्षेत्र के पश्चिमी दिशा में स्थित टिकरी वन प्रदेश में भगवत भक्ति में लीन ऋषि उद्दालक ने अपने कनिष्ठा अंगुली के नख से पृथ्वी पर एक रेखा खींचकर मां गंगा का आह्वान किया।